uttarakhand : मजबूर पिता या राक्षस ?,अपने ही मासूम बेटे का गला दबाकर शव खेत में फेंका

कई बार ऐसे वाक्या सामने आते है जो हमे झकझोर के रख देते है ऐसा ही एक मामला उत्तराखंड के बहेड़ी क्षेत्र की सीमा से सटे सिरौलीकलां गांव से सामने आया है। जिसमें एक ट्रक ड्राइवर ने अपने साढ़े तीन साल के बेटे को पहले गला घोंटकर मार दिया और खुद जाकर थाने में गुमशुदा होने की एप्लिकेशन दर्ज कराई। आरोपी पिता ने उसका शव बहेड़ी में एक खेत में फेंक दिया।  इसके बाद थाने पहुंचकर गुमशुदगी भी दर्ज करा दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर घटना का खुलासा कर आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है।  बेटे की हीमोफीलिया बीमारी का महंगा इलाज न करा पाने के की वजह से अपने ही बेटे को मार दिया। 
एएसपी ममता बोहरा ने बीते दिन बताया कि पुलभट्टा थाने में पत्रकारों से कहा कि सिरौलीकलां निवासी मो. तारिक ने मंगलवार को गुमशुदगी दर्ज कराई थी कि उसका साढ़े तीन साल का बेटा शाबान मंगलवार सुबह उसके साथ बाइक से घूमने के लिए निकला था। इसके बाद वह उसे घर के बाहर छोड़कर अपने पैतृक गांव ढकिया बहेड़ी निकल गया। 
कैसे दिया वारदात को अंजाम-जब पुलिस ने घर और हाईवे के आसपास के सीसीटीवी खंगाले तो फुटेज में तारिक अपनी बाइक पर बेटे को साथ ले जाता दिखाई दिया लेकिन लौटते समय वह अकेला था, अलावा जब पुलिस टीम ने मो. तारिक से सख्ती से पूछताछ की तो वह टूट गया। और खुद अपना गुणबाह कुबूल किया,शव बहेड़ी (यूपी) के ढकिया गांव में अपने खेत में फेंक आया है।

आरोपी ने पुलिस को बताया की,उसका बेटा हीमोफीलिया नामक गंभीर बीमारी से ग्रसित था। उसका इलाज बहुत पैसे में होता है।  पिछले एक डेढ़ साल से ट्रक के कारोबार में उसे लगातार घाटा हो रहा है। तीन-चार दिन पहले वह अपने बच्चे को लेकर हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल गया था जहां पर तमाम जांचों के बाद डॉक्टरों ने बच्चे को दिल्ली दिखाने की सलाह दी थी। सुबह ढकिया गांव के कुछ बच्चे लकड़ी काटने के लिए नहर किनारे पहुंचे तो वहां बालक का शव दिखाई दिया। तारिक के रिश्तेदार वहां पहुंचे तो बालक की शिनाख्त शाबान के रूप में की।

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