नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक मैगजीन में अपने एक इंटरव्यू में बड़ी ही दिलचस्प अंदाज़ में कहा कि “मुझे आलोचना पसंद है,लेकिन दुर्भाग्य है कि मेरी आलोचना करने वाले बहुत कम लोग है। ये संख्या बेहद कम है। लोग बड़ी जल्दी आरोप लगाने लग जाते हैं, ऐसे समय में मैं आलोचना करने वाले लोगों को बहुत याद करता रहता हूं। साथ ही उन्होंने आलोचकों पर सीधा निशाना साधा और कहा कि आलोचना और आरोप में बहुत बड़ा अंतर होता है। आरोप वे लगाते हैं, जिनके पास मुद्दे से जुड़ी जानकारी बेहद कम होती है। जबकि,आलोचना करने के लिए अध्ययन और शोध करना पड़ता है। इन दोनों ही कामों में बड़ी मेहनत लगती है।
इस साक्छात्कार में पीएम ने ये भी कहा है कि हमारी सरकार ने अनुसंधान को प्राथमिकता देती है और दे रही है। उन्होंने एक विज्ञान सम्मेलन को याद करते हुए कहा कि हमने जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान से आगे बढ़कर जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान पर जोर दिया। इसी वजह से रत आत्मनिर्भर बन रहा है और दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान हम चला रहे हैं। भारत में वैक्सीनेशन का श्रेय पीएम ने देश की जनता को दिया है। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा अभियान चलाने में तकनीकि का बहुत बड़ा योगदान है। यह इस अभियान की असल हड्डी बना जैसे शरीर में रीढ़ की हड्डी का योगदान होता है वैसे ही वैक्सीन न होती तो क्या स्थिति होती, कल्पना करना भी भयावह है और बेहद कठिन। देश के कई देश ऐसे हैं जहां वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। लेकिन भारत में टीकाकरण के लिए हमें आत्मनिर्भर अभियान को शुक्रिया करना चाहिए। टीकाकरण पर और जानकारी देते हुए पीएम ने बताया कि भारत सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के तहत 69 प्रतिशत लोग वैक्सीन का कम से कम एक डोज ले चुके हैं। वहीं 25 प्रतिशत लोगों को दोनों डोज लग चुके हैं। भारत सरकार ने दिसंबर के अंत तक वैक्सीनेशन पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्यों में तेज़ी से चल रहे टीकाकरण को देखकर लगता भी है कि यह पूरा हो सकेगा।
मैं आलोचकों को बहुत मिस करता हूँ : प्रधानमंत्री मोदी

