लखनऊ : सर्दियों के मौसम में सबसे मशहूर और हरोशोल्लास से मनाया जानें वाला त्यौहार मकर संक्रांति-लोहड़ी कल पूरे देश भर में मनाया जाएगा। लेकिन आपको बतादें कि अलग अलग जगहों के अक्षांश-रेखांश के मुताबिक़ सूर्योदय के परिणामस्वरूप सूर्य के राशि परिवर्तन में समय का अंतराल आ जाता है। इसलिए इस बार भी खिचड़ी का त्यौहार 14 को होगा या 15 को इस पर संशय है।
वाराणसी के पंचांगों के साथ-साथ देश के अन्य भागों के अधिकतर पंचांगों में सूर्य का राशि परिवर्तन 14 जनवरी की रात्रि 08 बजे के बाद दिखा रहा है अतः वाराणसी के पंचांग के मुताबिक़ यह त्यौहार 15 जनवरी को ही मनाया जाएगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही सभी तरह के मांगलिक कार्य जैसे यज्ञोपवीत, मुंडन, शादी-विवाह, गृहप्रवेश आदि आरम्भ हो जाएंगे। सूर्य की दक्षिणायन यात्रा के समय जो देवप्राण शक्तिहीन हो गये थे उनमें पुनः नई ऊर्जा शक्ति का संचार हो जाएगा।
स्नान का विशेष महत्त्व -दान पुण्य का भी रिवाज़
ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति पर गंगा, यमुना, सरस्वती, नमर्दा, कृष्णा, कावेरी आदि सभी पवित्र नदियों में स्नान करके सूर्य को अर्घ्य देने से सभी पापों का नाश होता है पुण्य की प्राप्ति भी होती है। पितृ भी तृप्त होकर अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं यहां तक कि इस दिन किए जाने वाले दान को महादान की श्रेणी में रखा गया है।
वैसे तो सभी संक्रांतियों के समय जप-तप तथा दान-पुण्य का विशेष महत्व है किन्तु मेष और मकर संक्रांति के समय इसका फल सर्वाधिक प्रभावशाली कहा गया है इसका यही कारण है कि मेष संक्रांति देवताओं का अभिजित मुहूर्त होता है और मकर संक्रांति देवताओं के दिन का शुभारंभ होता है। इस दिन सभी देवता भगवान श्री विष्णु और मां श्रीमहालक्ष्मी का पूजन-अर्चन करके अपने दिन की शुरुआत करते हैं इस दिन गुड़ तिल से बने पकवान ादी दान भी किए जाते हैं।
ऊनी कंबल, जरूरतमंदों को वस्त्र विद्यार्थियों को पुस्तकें पंडितों को पंचांग आदि का दान भी किया जाता है। इसके लावा ग़रीबों को पंडितो को खाद्य पदार्थ जैसे फल, सब्जी, चावल, दाल, आटा, नमक आदि जो भी यथा शक्ति संभव हो उसे दान करके संक्राति का पूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है पुराणों के अनुसार जो प्राणी ऐसा करता है उसे विष्णु और श्रीलक्ष्मी दोनों का आशीर्वाद मिलता है।

