उत्तराखंड में लीज पर होटल लेकर चलाने वाले कारोबारी अनलॉक 5 लागू होने के बाद एक अजीब उलझन में फंस गए हैं। महामारी के कारण लागू किया गया लॉकडाउन भले ही अब चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, लेकिन देवभूमि के होटल व्यवसायियों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
विदित है कि उत्तराखंड दशकों से दुनियाभर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां प्रतिवर्ष देश-विदेश से करोड़ों सैलानी आते हैं। राज्य में बड़ी तादाद में होटल स्थित हैं। इनमें से अधिकांश होटल लीज पर संचालित होते हैं। एक अनुमान के मुताबिक राज्य में दस हज़ार से अधिक छोटे-बड़े होटल ऐसे हैं जिनको उनके मालिकों ने सालाना रकम तय कर ठेके पर संचालन हेतु दिया हुआ है। लीज होटल कारोबारी न केवल अच्छा मुनाफा कमाते हैं बल्कि राज्य में कई लाख लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।
कोरोना लॉकडाउन में जहां दुनियाभर की आर्थिक गतिविधियां रुक गई थी, उस वक्त पर्यटकों की आवाजाही पर रोक के कारण होटल व्यवसाय भी ठप पड़ गया था। कारोबार ना होने के कारण लीज़ होटल व्यवसायियों ने होटल मालिकों के सामने उस दौरान लीज रेंट न दे पाने की मजबूरी बयां की तो मालिकों ने भी उन्हें राहत प्रदान की थी। अब जैसे-जैसे सरकार अनलॉक की प्रक्रिया लागू कर रही है, लोगों की आवाजाही भी शुरू हो गई है। लोग अपने कामकाज को पटरी पर लाने के लिए संघर्ष करते दिख रहे हैं। हालांकि लोगों की आर्थिक हालात कमजोर होने तथा कोरोना का भय होने के कारण पर्यटन उद्योग को पंख लगने में अभी और वक्त लग सकता है। लेकिन उत्तराखंड सरकार द्वारा अनलॉक 5 में होटल व्यवसाय को पूरी तरह खोल देने तथा पर्यटकों के लिए कोरोना टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट साथ लाने की शर्त समाप्त करने के बाद से होटल कारोबारियों की परेशानी बढ़ गई है। दरअसल पिछले कई महीनों से कमाई न होने से लीज़ किराये में छूट ले रहे होटल कारोबारियों का मानना है कि सरकार के इस निर्णय से होटल स्वामियों ने उन पर किराया देने का दबाव बनाना शुरू कर दिया है। जबकि कोरोना के डर के कारण अभी भी सैलानी यात्रा करने से परहेज कर रहे हैं। यानी सरकार द्वारा होटल व्यवसाय पर कोरोना काल में लगाई गई बंदिशे भले ही समाप्त हो गई हों लेकिन देवभूमि अभी पर्यटकों से गुलजार होती दिखाई नहीं दे रही है।
हमने कुछ ऐसे होटल कारोबारियों से बात कर उनकी मुश्किलें जानने की कोशिश की तो पता चला होटल व्यवसाई बेहद तनाव में हैं। उत्तराखंड में 20 कमरों के एक होटल को लीज पर लेकर चलाने वाले कारोबारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि 22 मार्च को लागू किए गए लॉकडाउन से पहले से ही होटल व्यवसाय ठप पड़ा है। पिछले 7 महीनों में बमुश्किल अपना घर खर्च चला पाए हैं। कई महीनों से होटल का बिजली का बिल भी बकाया चल रहा है। उन्होंने बताया कि महामारी के कारण लोग डरे हुए हैं। अभी पर्यटकों के आने की संभावना नजर नहीं आ रही है। लेकिन अक्टूबर माह लगते ही होटल मालिकों ने किराया मांगना शुरू कर दिया है।
वहीं एक और होटल व्यवसाई ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से काम ना होने के बावजूद बमुश्किल होटल का मेंटेनेंस का खर्च उठा रहे हैं। होटल स्वामियों ने अप्रैल से सितंबर तक का किराया तो छोड़ दिया है, लेकिन अब अक्टूबर के किराए के लिए कहा जा रहा है। उन्होंने बताया कि यदि किराया नहीं देंगे तो डर है कि मालिक होटल खाली करने के लिए कह सकते हैं। ऐसे में कारोबार न चलने के बावजूद भी किराया देना हमारी मजबूरी है। हालांकि ऐसी खबरें मिल रही है कि कई जगहों पर होटल स्वामियों व लीज़धारियों के बीच विवाद भी हो रहा है। इसका कारण बकाया किराए की वसूली को बताया जा रहा है।

