सुप्रीम कोर्ट ने आज शुक्रवार को साल 2011 की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला आगे सुरक्षित किया है जिसमें जटिल कानूनी मुद्दा उठाया गया था, जिसमें पूछा गया था कि बिना शादी के पैदा हुए बच्चे क्या हिंदू विवाह अधिनियम के चलते अपने माता-पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार होंगे या नहीं।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने याचिका पर विभिन्न वकीलों की दलीलें सुनीं और फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित किया गया है अब इसपर कोर्ट फैसला करेगा कि क्या बिना शादी के पैदा हुए बच्चों का अधिकार, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 16(3) के अंतर्गत सिर्फ अपने माता-पिता द्वारा अर्जित की गई संपत्ति पर ही होगा या फिर पूरी पैतृक संपत्ति पर भी उसका अधिकार होगा।

