गौरतलब है कि पंजाब चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में छात्राओं के वीडियो वायरल मामलें में मोहाली पुलिस की हर दलील झूटी सामने आ रही है। पहले एसएसपी ने बताया था कि आरोपी ने केवल अपना ही वीडियो बनाया और दोस्त को भी भेजा। इसके बाद कोर्ट में कहा गया कि वीडियो बनाने वाली छात्रा ने खुद का और एक अन्य छात्रा का ही वीडियो रिकॉर्ड किया है। वीडियो में दूसरी छात्रा का चेहरा नहीं दिख रहा है। आरोपियों को रिमांड पर लेने के लिए अदालत ने तर्क दिया कि यह अपराध काफी गंभीर श्रेणी का है। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हुआ है। इसमें पता लगाया जाना है कि डिलीट वीडियो किसके हैं और वीडियो किसे साझा किए गए। आरोपियों के फोन फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।
आरोपी लड़के की तरफ से भेजे गए एक स्क्रीनशॉट से मामले का खुलासा हुआ। अब पुलिस की ये बात भी झूठी साबित हो गई है। पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि कहीं इनके संबंध किसी विदेशी नेटवर्क से तो नहीं हैं, जो पोर्न वेबसाइट से जुड़ा हो।

