उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों पर करोड़ों रुपये खर्च हुआ जिसके बाद भी हालत में कोई सुधार नहीं आया। अब इन्हें गोद देने पर विचार चल रहा है। सामर्थ्यवान सरकारी स्कूलों को गोद लेकर इनमें संसाधनों को पहुंचाया जाएगा। यही नहीं वह अपने माता पिता या किसी अन्य स्वजन के नाम पर इन स्कूलों का नामकरण भी करेंगे। शिक्षा विभाग की तरफ से नीति तैयार हो रही है। 16 स्कूलों में भवन, 286 में बालक शौचालय, 114 में बालिका शौचालय, 81 में पेयजल, 57 में बिजली और 384 में पुस्तकालय नहीं है।
स्कूलों को गोद लेने वाले व्यक्ति के माता-पिता या किसी अन्य के नाम पर स्कूल का नामकरण होगा। इसके बदले संबंधित को स्कूल पर आने वाले कुछ खर्च वहन करना होगा। विभाग की तरफ से प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे कैबिनेट के सामने पेश किया जाएगा।
प्रदेश में सरकारी स्कूलों की हालत खस्ता

