आज गणपति बप्प्पा घर घर विराजे हैं। देश में गणपति पूजा खूब जोर शोर से की जाती है। मान्यता है कि गणपति बाप्पा हर वर्ष सबकी विघ्नों को हरने आते हैं इसी श्रद्धा भावना से भक्त घर में गणेश भगवान को लाकर उनकी भावना से पूजा वंदना करते हैं। देश के 10 प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में से एक प्रदेश के उत्तरकाशी के डोडीताल क्षेत्र में है। इस जगह भगवान गणेश की पूजा मां अन्नपूर्णा संग की जाती है।
यह विश्व का एक ही ऐसा मंदिर है, जहां गणपति और मां अन्नपूर्णा मंदिर के अंदर विराजमान हैं, जबकि शिव मंदिर के बाहर विराजे हैं। मना जाता है कि मां अन्नपूर्णा ने इसी स्थान पर गणेश को जन्म दिया था। स्थानीय बोली में भगवान गणेश को यहां डोडीराजा कहा जाता है। जिला मुख्यालय से करीब 22 किमी दूर स्थित डोडीताल समुद्रतल से करीब 3100 मीटर ऊपर है। यह जगह असी गंगा केलसू में है जहां की बहुत मान्यता है। यह अन्नपूर्णा माता का प्राचीन मंदिर झील के किनारे है। मान्यता है कि डोडीताल ही मां अन्नपूर्णा का स्नानस्थल भी था।
कैसे गणेश का हुआ जन्म –
माता अन्नपूर्णा ने हल्दी के उबटन से गणेश भगवान की उत्पत्ति हुई वह स्नान के लिए चली गईं और बाहर गणेश को द्वारपाल के रूप में तैनात किया उन्होंने द्वार पर पूरी निगरानी की। शिव भगवान को भी अंदर जाने से रोक दिया था। फिर भगवन शिव ने उनका सर धड़ से अलग कर दिया था और तभी माता गुस्से में आ गयीं और भगवन शिव ने गरुड़ को पीठ करती सोइ माँ के बच्चे का सर लाने को कहा तभी एक हथनी अपने बच्चे से पीठ करके सोइ थी उसका सर गरुड़ ने लाकर दिया और गणेश के धड़ से जोड़ दिया गया।इस मंदिर में हर साल बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं।

