उत्तराखंड में बरपा धर्म संसद बवाल अभी पूरी अठारह खत्म नहीं हुआ है अब इसपर प्रदेश में मशहूर लेखिका नयनतारा सहगल, उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एसके दास समेत कई क्षेत्रों के लोगों ने उत्तराखंड में धर्मजाति पर विवादित बयानों और सांप्रदायिक तनाव की स्थिति पर अपनी राय रखते हुए चिंता जताई है। इन सभी लोगों ने प्रदेश सीएम पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखा है जिसमें जिक्र किया है कि राज्य में शांति और और सौहार्द बनाने के लिए अधिकारियों को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाए।
इसके अलावा इस पत्र में सीएम से कहा गया है कि उत्तराखंड शांतिपूर्ण राज्य के तौर पर सभी जगह अपनी पैठ बनाया हुआ है। सांप्रदायिक हिंसा को रोकने के लिए कुछ अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों की त्वरित कार्रवाई से सद्भाव और लोकतंत्र के लिए स्थानीय आबादी की प्रतिबद्धता भी प्रकट होती है। लेकिन उत्तराखंड में नफरत और सांप्रदायिक तनाव फैलाने की कोशिश बेहद चिंता का विषय बनता जा रहा है।
राज्य की संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रभावी कार्रवाई होनी बहुत ज़रूरी है। पत्र में कथित आयोजकों द्वारा छह मई के बाद धर्म संसद जैसे आयोजन के एलान पर चिंता जताई गई है और इस बारे में 26 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देशित किए जाने की भी बात कही गई है।
निम्न द्वारा लिखा गया पत्र-
कुमाऊं विवि के पूर्व कुलपति बीके जोशी, उप नियंत्रक एवं महालेखाकर (सेनि.) निरंजन पंत, डीआरडीओ के विज्ञानी (सेनि.) पीएस कक्कड़, सर्व सेवा संघ की बीजू नेगी, आरटीआई क्लब उत्तराखंड के अध्यक्ष बीपी मैठाणी, सिविल इंजीनियर सीवी लोकगड़ीवार, पर्यावरणविद फ्लोरेंस पांधी, लेखिका इंदिरा चंद, शिक्षाविद् ज्योत्सना बराड़, ममता गोविल और वीरेंद्र पैन्यूली, उत्तराखंड महिला मंच की कमला पंत, पूर्व शिक्षा निदेशक एनएन पांडेय, पत्रकार रंजोना बैनर्जी, पर्यावरणविद रवि चोपड़ा, रिटार्यड बैंकर रमेश चंद, चेतना आंदोलन के शंकर गोपाल, लेखिका नयनतारा सहगल, पूर्व मुख्य सचिव एसके दास के साथ पूर्व सचिव विभा पुरी दास, आईजी पुलिस (सेनि.) एसआर दारापुरी, राजीव गांधी इंस्टीटयूट ऑफ कांटेम्पररी स्टडीज के निदेशक विजय महाजन, आईपीएस (सेनि.) विजय शंकर सिंह ने पत्र लिखा है।

