कई राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन में बड़े फेरबदल करने जा रही है। हाल ही में हुए पांच राज्यों के चुनावों में करारी शिकस्त के बाद पार्टी नेतृत्व दबाव में है। ऐसे में इस फेरबदल में कई प्रदेश अध्यक्षों व राज्य प्रभारियों की छुट्टी तय है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पार्टी आलाकमान मई के दूसरे हफ्ते में यह बड़ा बदलाव करना चाहता था, किंतु कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते तब इसको टाल दिया गया था। अब कहा जा रहा है कि जून की शुरुआत में ही संगठन के पत्ते फेटे जाने के आसार हैं।
विदित है कि अगले साल की शुरुआत में ही उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड व पंजाब सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। माना जा रहा है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का पहला फोकस इन्हीं राज्यों के संगठन पर होगा। सूत्रों के अनुसार आलाकमान के पास इनमें से कुछ राज्यों की रिपोर्ट अच्छी नहीं पहुंची है। यहां चुनाव जीतने के लिए संगठन में फेरबदल को अहम माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में तो संगठन का कामकाज प्रभारी महासचिव की हैसियत से प्रियंका गांधी वाड्रा देख रही हैं। ऐसे में यहां बदलाव की संभावना भी कम है। वैसे भी यूपी में कांग्रेस के पास खोने के लिए ज्यादा कुछ नहीं है। वहीं पंजाब और उत्तराखंड ऐसे राज्य हैं जहां कांग्रेस को चुनावी नतीजे अपने पक्ष में आने की उम्मीद है। लिहाजा इन राज्यों के लिए कुछ बड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
पंजाब में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की जुबानी जंग पार्टी को परेशान कर रही है। नेताओं की चिंता इस बात को लेकर है कि भाजपा व अकाली दल के खिलाफ किसानों की नाराजगी से मिली बढ़त को कांग्रेस कहीं आपसी झगड़ों में न गंवा दे।
उधर उत्तराखंड में पार्टी पूरी तरह कई धड़ो में बटीं हुई है। हालांकि राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ लोगों की नाराजगी की वजह से बीजेपी को मुख्यमंत्री तक बदलना पड़ा है। लेकिन कांग्रेस का लचर संगठन पार्टी को चुनावी जीत दिलाने की स्थिति में नहीं है।
कुछ राज्यों के प्रभारी भी आलाकमान की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। इनमें कई वरिष्ठ चेहरे भी शामिल हैं। वहीं पार्टी के कुछ डिपार्टमेंट के प्रमुखों को भी बदले जाने की योजना तैयार है। इनमें नए लो प्रोफाइल नेताओं को तरजीह दी जा सकती है।

