धामी सरकार ने स्पष्ट किया है कि उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर तीर्थ पुरोहितों की सभी शंकाओं का समाधान किया जाएगा। इस बारे में सभी संबंधित लोगों से वार्ता भी की जाएगी।
बोर्ड बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार का काम मंदिरों की आंतरिक व्यवस्थाओं पर अधिकार करना नहीं बल्कि सहयोग करना है और हमारा उद्देश्य मंदिर परिसरों की सुविधाओं के विकास में सहयोगी बनना है। धामी ने कहा कि इस बारे में सभी संबंधित लोगों से वार्ता भी की जाएगी।
महत्वपूर्ण निर्णय
-श्री बद्रीनाथ, श्री केदारनाथ, गंगोत्री एवं यमुनोत्री मन्दिरों के गर्भगृह से सीधा प्रसारण नहीं किया जाएगा।
-यात्रा संचालित नहीं होने की दशा में आवश्यकता पड़ने पर बोर्ड को अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जाएगी। -सीएम ने इस बारे में बोर्ड में संशोधित प्रस्ताव लाने को कहा।
-केदारनाथ धाम में पूजा और यात्रा व्यवस्था के सफल संचालन हेतु बनाए गए मास्टर प्लान के अनुसार आधारभूत संरचनाओं के निर्माण कार्य के लिए कन्सलटेंट चयनित करने पर भी बैठक में सहमति दी गई।
क्या है मामला
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में लाए गए एक अधिनियम के जरिए उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड का गठन किया गया और उसे चारधाम सहित 51 मंदिरों के प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई, जिसे अपने अधिकारों का हनन मानते हुए तीर्थ पुरोहित आंदोलन कर रहे हैं।

