देहरादून : जहां आज कल उत्तराखंड में कोरोना के मामलों के बढ़ने की आशंका है वही प्रदेश में पिछले काफी समय से घातक बिमारी कैंसर के भी मामलीन तेज़ी से निकलकर आए हैं। अगर बात करें आंकड़ों की तो,प्रति वर्ष राज्य में हजारों लोग इस घातक की रोग के चपेट में आ रहे हैं। ज्यादातर मामलों में लोगों को इस रोग के बारे में तब जानकारी मिली है,जब वे किसी दूसरे रोग का इलाज कराने पहुंच रहे हैं। सिर्फ उत्तराखंड में ही नहीं, स्वास्थ्यवर्द्धक आबोहवा वाले हिमालयी राज्यों में कैंसर के मामलों में हो रही बढ़ोतरी चिंता का कारण मानी जा रही है।आपको बतादें कि पिछले दिनों संसद सत्र के दौरान लोस में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम की रिपोर्ट के हवाले से राज्यवार कैंसर के मामलों के जो आंकड़े निकाले गए। जिसमें उत्तराखंड से मामलें अधिक है जिसनें चिंता बढ़ा दी है। 2018 में उत्तराखंड में 10932 कैंसर के मामले सामने आए थे। 2020 तक कैंसर के मामले बढ़कर 11482 मामले हो गए। यह संख्या चार से पांच फीसद की दर से बढ़ी है।
इतना ही नहीं राज्य में हर साल छह हजार से अधिक लोगों की मौत की वजह कैंसर बन रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कैंसर के मामलों में उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में तीसरे स्थान पर है। असम राज्य में 2020 में सबसे अधिक 37880 कैंसर के मामले सामने आए।

