देहरादून: उत्तराखंड में आशा कार्यकर्ताओं का लम्बे समय से अपनी मांगों को लेकर चल रहा प्रदर्शन समाप्त हुआ। दरअसल,आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर आज आशा कार्यकर्ता मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय कूच करने के लिए सितारगंज रोड स्थित नागरिक अस्पताल में इकठ्ठी हुईं। सिर्फ देहरादून की ही नहीं बल्कि इस प्रदर्शन में उत्तराखंड के अन्य हिस्सों से भी आशाएं पहुंची थीं। जिनमें नैनीताल, अल्मोड़ा, हल्द्वानी, रुद्रपुर, किच्छा, सितारगंज, नानकमत्ता आदि क्षेत्रों से आशाएं आयीं थीं।
आज शुरू हुए इस प्रदर्शन में आशा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय कूच करने के लिए जुलूस निकाला तो पुलिस प्रशासन ने उन्हें तहसील गेट पर थमने को कहा लेकिनइस पर आशाओं एवं पुलिस प्रशासन में तीखी नोक-झोंक हुई। आशाएं तहसील गेट पर धरना देने बैठ गयीं। यहाँ आज एसएसपी दलीप सिंह कुंवर ने शिष्टमंडल को सीएम से मिलाने का विश्वास दिलाया और आशा कार्यकर्ता कुछ शांत होकर मान गईं। जिसपर बाद में करीब तीन बजे प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल के नेतृत्व में यूनियन का सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल खटीमा स्थित राइस मिल में बने हेलीपैड पर सीएम से मिला। आशाओं की बात सुनने के बाद सीएम ने 20 दिन में मांगों का शासनादेश जारी करने की बात कही।
प्रतिनिधिमंडल में आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन के प्रदेश महामंत्री कैलाश पांडेय, इंद्रा देउपा, ममता पानू, गीता कश्यप, सरस्वती पुनेठा, लीला ठाकुर, कुलविंदर कौर, रिंकी जोशी, चंपा मेहता आदि उपस्थित थे।सीएम पुष्कर सिंह धामी के वाडे के उपरान्त ही प्रदेश में करीब 30 दिन से लगातार चल रही सख्त हड़ताल का समापन हुआ। खटीमा में विरोध-प्रदर्शन करने के बाद उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की प्रदेश अध्यक्ष कमला कुंजवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से मिला। इस दौरान सीएम धामी ने घोषणा की कि 20 दिन में उनकी मांगें पूरी होने का शासनादेश जारी हो जाएगा।

