गौरतलब है कि उत्तराखण्ड के जोशीमठ में भू-धंसाव का संकट बेहद चिंता का विषय बनकर सामने आया है जिसके बाद प्रदेश सरकार पहले से ही बचाव कार्य की योजना बनाने में लगी है जिन लोगों के घर असुरक्षित है उन्हें तोड़ा जाना तय हुआ है और साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामलें में बोलने से इंकार किया है। लेकिन लगता है लोगो की दुआएं और भगवान्मं के आशीर्वाद से कुछ ठीक हो जाने के भी आसार नज़र आ रहे हैं। जिनमें बीते दिन मगलवार को दो सुखद खबरें आईं। पहली जेपी कॉलोनी में फूटे पानी के फव्वारे की रफ्तार धीमी पड़ी है तो दूसरी नए घरों में दरारें की बात सामने नहीं आई है। 2 जनवरी को जोशीमठ के सबसे नीचले हिस्से में मुख्य नगर से करीब नौ किमी दूर मारवाड़ी स्थित जेपी कॉलोनी में मटमैले पानी की एक जलधारा फूट पड़ी थी। जो तब से लगातार बह रही है।
जोशीमठ में हुए भू-धंसाव के लिए प्रारंभिक जांच में जमीन के नीचे जमा हुए पानी के रिसाव को ही कारण माना जा रहा है। जबकि पानी का यह रिसाव अब भी शासन-प्रशासन और वैज्ञानिकों के लिए अबूझ पहेली बन गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाइड्रोलॉजी रुड़की के वैज्ञानिकों की टीम ने इस पानी के नमूने भी लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए लैब भी भेज दिया गया है।
सचिव मुख्यमंत्री मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि रविवार को पानी का डिस्चार्ज 560 लीटर प्रति मिनट था, जो मंगलवार को घटकर 360 एलएमपी पर पहुंच गया।

