आखिर जन्माष्टमी दो दिन क्यों ? जानिए शुभ मुहूर्त तिथि !

भगवान्  को देश भर में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।  इस पर्व को बेहद शुभ और मजहत्वपूर्ण कहा गया है। यह हिंदुओं के बीच एक अत्यधिक महत्वपूर्ण त्योहार है क्योंकि भगवान विष्णु ने भगवान श्री कृष्ण के रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। मान्यता ये भी है कि  भगवान कृष्ण का जन्म पांच हजार साल पहले द्वापर युग में मथुरा शहर में मध्यरात्रि में हुआ था। कृष्ण जन्माष्टमी एक लोकप्रिय और बहुप्रतीक्षित त्योहार है और इसे गोकुलाष्टमी, सातम आठम, श्री कृष्णष्टमी, श्रीकृष्ण जयंती और अष्टमी रोहिणी जैसे विविध नामों से पूरे भारत में इसे ख़ुशी के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिरों को झालरों फूलों और लाइटों से भव्य सजाया जाता है।

कीर्तन गाए जाते हैं, घंटियां बजाई जाती हैं, शंख बजाया जाता है और भगवान कृष्ण की स्तुति में संस्कृत के भजन गाए जाते हैं। भगवान कृष्ण की जन्मस्थली मथुरा में इस समय विशेष आध्यात्मिक सभाओं का आयोजन किया जाता है। पूरे भारत के तीर्थयात्री इन उत्सव समारोहों में शामिल होते हैं। लेकिन कृष्ण जन्माष्टमी अक्सर 2 दिन मनाई जाती है एक दिन स्मार्त द्वारा दूसरा वैष्णवों द्वारा। 
क्यों दो दिन का त्यौहार ?-आपको बता दे कि जन्माष्टमी मूल रूप से संप्रदाय के मुताबिक़ होता है और दो दिन मनाया जाता है। वैष्णव सम्प्रदाय और स्मार्त सम्प्रदायहैं। जब जन्माष्टमी तिथि सामान्य होती है तो वैष्णव संप्रदाय और स्मार्त संप्रदाय दोनों एक समान तिथि का पालन करते हैं और एक ही दिन मनाते हैं। लेकिन अगर तारीखें अलग हैं तो स्मार्त संप्रदाय पहली तारीख को मनाता है और वैष्णव संप्रदाय बाद की तारीख को मनाता है। अगर हम बात करें वैष्णव संस्कृति अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र की तो ये त्यौहार इनके लिए प्रतिबद्ध है और वे उसी के अनुसार त्योहार मनाते हैं लेकिन स्मार्त संस्कृति सप्तमी तिथि को पसंद करती है। वैष्णव के लिए कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार हिंदू कैलेंडर की नवमी और अष्टमी को होता है। 

शुभ समय तिथि –जन्माष्टमी तिथि: 18 अगस्त 2022,  गुरुवार
अष्टमी तिथि का आरंभ: 18 अगस्त, गुरुवार रात्रि  09: 21 मिनट से 
अष्टमी तिथि का समाप्त:19 अगस्त, शुक्रवार रात्रि 10:59 मिनट तक

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