देहरादून : सभी राज्यों में मानसून की बारिश ने चारों तरफ जल भराव और पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन आदि से उत्तराखंड के कई क्षेत्रों में तबाही है। सभी पर्वतीय क्षेत्रों में हालात बद्द्तर होते जा रहे हैं। यहां 90 सड़कों पर आवाजाही पूरी तरह ठप है। सीमांत पिथौरागढ़ जिले के धारचूला में रविवार रात बादल फटने के बाद तबाही मची थी। सोमवार रात को मुनस्यारी के धामी गांव में भारी बारिश से तीन मकान ध्वस्त हो गए। हालांकि, मंगलवार को गढ़वाल में बारिश ने कुछ राहत दी, लेकिन कुमाऊं में तेज बौछारों का सिलसिला जारी है। दून में सुबह से तेज धूप खिल रही है लेकिन हलकी बौछारे गिरने लगीं हैं। लगातार हो रही बारिश से उत्तराखंड में खासा नुकसान हुआ है। टिहरी जिले में बीते दिनों हुई बारिश के कारण भूस्खलन होने से बंद छह ग्रामीण मोटर मार्ग एक पखवाड़े बाद भी नहीं खुल पाए हैं। वहीं, टिहरी झील के जलस्तर में निरंतर बढ़ोत्तरी हो रही है। मंगलवार को झील का जलस्तर 820.45 मीटर तक पहुंच गया। झील में चेतावनी रेखा 830 मीटर पर है। मौसम विभाग के अनुसार,बौछारों का क्रम बना रह सकता है। बीते दिन (मंगलवार) को तड़के चमोली जिले में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। यहां बदरीनाथ धाम में चोटियों पर हल्की बर्फबारी के बाद ठंड की शुरुआत हो गई है।
अगस्त माह में बागेश्वर में डेढ़ गुना अधिक बारिश तो पौड़ी में आधी भी नहीं हुई है। अगस्त का महीना उत्तराखंड पर काफी भारी गुजरा है, लेकिन मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक़ इस माह राज्य के ज्यादातर जिलों में बारिश सामान्य से कम हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगस्त में आमतौर पर प्रदेश में ओवरआल 398 मिमी बारिश होती है, मगर इस वर्ष 306 मिमी बारिश ही दर्ज की गई।

