शहरी निकायों में तबादला एक्ट में गड़बड़ी,जिम्मेदार कौन?

राज्य में 2018 में लागू हुए तबादला एक्ट को प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर निकायों में अभी तक लागू  प्रक्रिया में नहीं लाया गया है इस वजह से शहरी विकास विभाग में कभी भी कर्मचारियों के तबादले हो जाते हैं। इससे पहले भी कई बार तबादले विवादों में सामने आए हैं। 

आपको बतादें कि राज्य सरकार ने बीते वर्ष 2017 में उत्तराखंड लोक सेवकों के लिए वार्षिक स्थानांतरण अधिनियम जारी किया था, जिसकी अधिसूचना पांच जनवरी 2018 को जारी हुई थी। इस अधिनियम के बिंदु संख्या 1(3) में लिखा गया था कि यह अधिनियम अखिल भारतीय सेवा, राज्य सिविल सेवा व राज्य पुलिस सेवा, उच्च न्यायालय के नियंत्रणाधीन समस्त सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी राज्याधीन सेवाओं के लिए जारी किया जाएगा। 

इसे राज्य सरकार अधिसूचना के माध्यम से निगम, परिषद और स्थानीय निकायों पर भी लागू होंगे। लेकिन चार साल से यह अधिनियम प्रदेश में लागू है, लेकिन शहरी विकास विभाग में लागू नहीं है। मामले में जानकारी के लिए सचिव दीपेंद्र कुमार चौधरी को फोन मिलाया गया, लेकिन उनका फोन नहीं लग सका।  मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल के किए हुए 74 तबादलों पर सीएम कार्यालय की रोक का यह पहला मामला है, लेकिन यहां होने वाले तबादले कई बार विवादों में आ चुके हैं। 

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