हरिद्वार : गौरतलब है कि धर्मसंसद मामलें वसीम रिज़वी की गिरफ्तारी के बाद मामला और गर्म हुआ है जिस गिरफ्तारी के विरोध में आज हरिद्वार में महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद अनशन पर बैठे थे और कहा था कि जब तक वसीम रिज़वी उर्फ़ जीतेन्द्र त्यागी की रिहाई नहीं होगी वो ऐसे ही अनशन जारी रखेंगें लेकिन उनकी भी गिरफ्तारी पुलिस डरा कर ली गई है। ख़बरों की मानें तो धर्मसंसद मामलें में ये गिरफ्तारी आज शनिवार सर्वानंद घात से हुई है। जहाँ यति नरसिंहानंद अनशन पर बैठे थे। मुख्य आरोपी वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी की गिरफ्तारी हो चुकी है। यती नरसिंहानंद गिरी पर हेट स्पीच के गंभीर आरोप गड़े हैं।
जिसको लेकर इनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल हुई थी जिसका संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार से हाल ही में जवाब तलब किया था। पुलिस को कार्यवाही करने के भी आदेश दिए गए थे। जिस मामलें पर गंभीरता दिखाते हुए हरिद्वार पुलिस द्वारा बीते दो दिन पहले वसीम रिजवी नासन बॉर्डर से गिरफ्तार किया गया और आज शनिवार को यदि नरसिंह आनंद गिरी और कुछ संतों को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। यह सभी संत धरना प्रदर्शन कर रहे थे।
आज शुरू हुई थी यति नरसिंहानंद की अनशन-
वसीम रिज़वी उर्फ़ नारायण त्यागी की गिरफ्तारी के विरोध में आज शनिवार को गाजियाबाद के डासना स्थित देवी मंदिर के महंत एवं जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यति नरसिंहानंद का अनशन कर रहे है। जिनका इस मामलें पर कहना है कि त्यागी के रिहा होने तक वह अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे। इससे पहले शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी उनको मनाने के लिए पहुंचे, लेकिन वहां उनकी एक नहीं सुनी गई थी।
क्या है धर्मसंसद मामला –
उत्तरी हरिद्वार के खड़खड़ी में 17 से 19 दिसंबर तक आयोजित धर्मसंसद में भड़काऊ भाषण देने के मामले में गिरफ्तार किए गए वसीम रिजवी उर्फ जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी को रिहा करने की मांग को लेकर स्वामी यति नरसिंहानंद सरस्वती गुरुवार की शाम को सर्वानंद घाट पर धरने पर बैठ गए थे और अनशन शुरू कर दिया था। शुक्रवार की सुबह दिनभर पुलिस फोर्स धरनास्थल पर डटी रही। वहीं शाम के समय सिटी मजिस्ट्रेट अवधेश सिंह और सीओ सिटी शेखर सुयाल ने उनसे मीटिंग भी की। महामंडलेश्वर स्वामी यति नरसिंहानंद ने कहा है कि जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी जब वसीम रिजवी था तब उसको गिरफ्तार नहीं किया गया। जब तक वसीम रिजवी को रिहा नहीं किया जाता तब तक वह अन्न-जल ग्रहण नहीं करेंगे।

