तीर्थ नगरी हरिद्वार में पितृ अमावस्या पर उमड़ा सैलाब,घाटों पर पैर रखने की नहीं जगह

हरिद्वार :आज श्राद्ध माह के पितृ पक्ष की अमावस्या है जहाँ तीर्थनगरी हरिद्वार, ऋषिकेश में गंगा स्नान और तपर्ण के लिए भक्तों का जनसैलाब उमड़ा। हरकी पैड़ी सहित हर गंगा घाट भक्तों से सराबोर हो गई। आज सुबह बुधवार को तड़के से ही स्नान और पितृ तर्पण का सिलसिला शुरू हो गया था। उत्तराखंड के साथ ही विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु हरिद्वार और ऋषिकेश आए हैं। 
वहीं सुबह से ही नारायणी शिला पर पूजा अर्चना करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। लेकिन कोरोना महामारी को देखते हुए के कपाट बंद मिले। इस वजह से श्रद्धालु परेशान हुए। कपाट सुबह 11 बजे के बाद खुले। अमावस्या पर पानी में तिल मिलाकर नहाने और पीपल में कच्चा दूध चढ़ाने से पितर प्रसन्न होते हैं। इस दिन श्राद्ध, तर्पण, पूजा पाठ और दान की आस्था होती है। अमावस्या के दिन उन लोगों का श्राद्ध किया जाता है। जिनके परिजनों को पितरों की देहांत तिथि ज्ञात नहीं होती है। अथवा भूल चुके हैं। ज्योतिषाचार्य आचार्य देवेंद्र प्रसाद भट्ट रानीपोखरी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार पितरों के लिए बनाए गए भोजन से पहले पंचबली भोग लगाया जाता है।

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