सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए : राष्ट्रपति जो बाइडन

पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे के चलते बड़ी खबर मिल रही है जिसके चलते आज मिलीं ताज़ा अपडेट के मुताबिक़ भारत के विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता पर अमेरिकी समर्थन पर ख़ास जानकारी दी है जिसके चलते सचिव हर्षवर्धन ने बताया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति “जो बाइडन” को लगता है कि भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता में होना चाहिए ये भारत को जल्द मिलनी भी चाहिए। श्रृंगला का ये भी कहना है कि भारत द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता की भी सराहना की गई, विशेष रूप से अफगानिस्तान मुद्दे पर। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत के प्रदर्शन के मद्देनज़र राष्ट्रपति जो बाइडन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में  स्थायी सीट देने की मांग को सराहा है। आपको बबतादें कि UNSC  में कुल 15 सदस्य देश सम्मिलित होते हैं।  जिनमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य होते हैं। 193 सदस्यों वाली महासभा हर साल इन 10 अस्थायी देशों को चुनने के लिए चुनाव करती है। अस्थायी देशों का कार्यकाल दो साल का होता है। फिलहाल स्थायी सदस्यता अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस के हिस्से में हैं।  
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच व्हाइट हाउस में प्रथम बैठक हुई जो बैठक काफी अच्छी बताई जा रही है मीडिया में आई ख़बरों के मुताबिक़ उन दोनों के बीच काफी हंसी-मजाक की बाते हुईं। दोनों ही नेताओं ने गर्मजोशी से एक-दूसरे का स्वागत अभिनन्दन किया। बाइडन ने कहा कि वे फिर से व्हाइट हाउस में मोदी का स्वागत कर के खुश हैं, तो वहीं मोदी ने बेहतरीन स्वागत के लिए बाइडन का धन्यवाद किया। इस दौरान एक मजेदार वाकया भी घटा। दरअसल, जब मीडिया के सामने दोनों नेता बातचीत कर रहे थे, तब बाइडन ऑफ-स्क्रिप्ट चले गए। उन्होंने बीच में ही मोदी को अपने 2006 के मुंबई दौरे और वहां मीडिया से हुई बातचीत के बारे में बताना शुरू कर दिया। इसके बाद शुरू हुआ हसी मजाक का माहौल और यादों को ताज़ा करने का दौर। बाइडन और पीएम मोदी की हुई इस बैठक में अफगानिस्तान में आतंकवाद पर भी चर्चा हुई उन्होंने तालिबान से संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव 2593 के तहत अपनी सभी प्रतिबद्धताओं का पालन करने की बात कही।  अफगान क्षेत्र का उपयोग किसी भी देश को आतंकवादी समूहों को शरण देने या प्रशिक्षित करने के लिए धमकाने और हमला करने के लिए नहीं किया जाता है। 

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