अचानक से पूरे देश भर में मौसम की चाल बदल गई है भारी बारिश के चलते मैदानी इलाकों के साथ साथ पहाड़ी इलाकों में भी बारिश की लगातार बौछारे जारी है। मौसम की बिगड़ती चाल के चलते उत्तर से लेकर दक्षिण तक केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं अचानक बर्फबारी ने जनजीवन पर भारी असर डाला है।
दो दिन पूर्व शनिवार से केरल में भारी बारिश के कारण बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 26 लोगों की मौत हो चुकी है। दो पहाड़ी जिले कोट्टायम और इडुकी सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कोट्टायम में सबसे ज्यादा 11 लोगों की मौत हुई है और कई घर बाढ़ में बह रहे हैं।
तमिलनाडु में भी बारिश के चलते तेनकासी जिले के कुट्रालम जलप्रपात और थेनी जिले के चिन्ना सुरुली जलप्रपात के क्षेत्रों में बाढ़ आ गई है। वन विभाग के अधिकारी लोगों को रोकने के लिए जलप्रपात क्षेत्रों पर कार्य चल रहा है। दक्षिण तमिलनाडु के तिरुनेलवेली, कन्याकुमारी थेनी, डिंडीगुल, मदुरै, रामनाथपुरम, विरुधुनगर, शिवगंगा, थूथुकुडी और तेनकासी में भारी बारिश हो रही है। मौसम विभाग की मानें तो यह बारिश साल 2019 और 2020 की तुलना में बहुत ज़्यादा है।
एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ के कारण रविवार को पूरे दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में आंधी के साथ भारी बारिश गिरी है। बारिश की वजह से पानी भर गया है। तीन डिग्री गिरकर 30.4 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भी 18 और 19 अक्तूबर को तेज बारिश की आशंका जताई गई है। उत्तराखंड में बारिश का रेड अलर्ट जारी करने के साथ ही देहरादून में सोमवार को सभी सरकारी और निजी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने का फैसला लिया गया है। मौसम विभाग ने 18 अक्तूबर के लिए रेड अलर्ट, जबकि 19 अक्तूबर के लिए ऑरेंज अलर्ट किया गया है।
बारिश से हुई परेशानियों का पीएम मोदी ने लिया जायज़ा –
आपको बतादें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से बारिश से हुई तबाही पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर कहा, केरल में भारी बारिश और भूस्खलन में कुछ लोगों की जान चली गई, यह दुखद है। भारी बारिश और भारी बर्फ़बारी की वजह से केदारनाथ यात्रा पर भी रोक लगा दी गई है। अधिकारी इस प्रभावितों की मदद के लिए जमीन पर कार्य कर रहे हैं।श्रद्धालुओं को सोनप्रयाग और गौरीकुंड में ही रोक दिया गया है। केदारनाथ में हजारों यात्री मौजूद थे, जिन्हें दर्शन के बाद वापस भेज दिया गया।

