विधानसभा चुनावों में अब काफी दिलचस्पी बढ़ती जा रही है। इसी कड़ी में उत्तराखंड में भी चुनावी माहौल बना हुआ है। इस चुनावी माहौल में हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर जिले चुनाव प्रचार के हॉट स्पाॅट बन गए हैं। शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कुंभ नगरी में कांग्रेस का प्रचार किया वहीँ बीते दिन रविवार को आप का प्रचार हुआ। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवालभी रविवार को यहां पहुंचे। देहरादून में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी जनसभाएं और डोर टू डोर जाकर मतदान की अपील की थी। खबरों की मानें तो, प्रदेश की 70 में से 30 सीटें तीन मैदानी जिले देहरादून, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में हैं। 2017 के विस में चुनाव में भाजपा ने मोदी लहर में इन तीन जिलों में 30 में से 25 सीटों पर जीत हांसिल की थी। लेकिन इस बार सवाल आता है कि “क्या इस बार भी भाजपा इन तीन जिलों में अपना पिछला प्रदर्शन दोहरा पाएगी? पार्टी की प्रचंड जीत में इन तीन जिलों की 30 सीटों अहम योगदान रहा है।
चुनाव पर विशेषज्ञों का कहना है कि भाजपा ने इन तीनों मैदानी जिलों में ढील नहीं छोड़ी और उसका इनमें लगातार पूरा फोकस है। पार्टी पिछले एक साल से सांगठनिक और रणनीतिक मोर्चे पर हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और देहरादून की सियासी फैसले लेती रही है। यूएस नगर से युवा पुष्कर सिंह धामी के हाथों में सत्ता की कमान सौंपने से लेकर सांसद अजय भट्ट को केंद्र में रक्षा राज्यमंत्री बनाने, हरिद्वार से मदन कौशिक को भाजपा की बागडोर सौंपने व देहरादून जिले गणेश जोशी को कैबिनेट मंत्री बनाने के फैसलों को इसी रणनीति बताया जा रहा है।

