कांग्रेस के लिए स्टार प्रचारक बन मैदान में उतरेंगें हरक सिंह रावत

देहरादून : गौरतलब है चुनावी माहौल में नेताओं का पार्टियों से नाराज़ होकर दल बदलने का दौर जारी है। जिसमें कई दिग्गज और बड़े नेता भी वर्तमान पार्टी से किनारा करके दूसरी पार्टी में शामिल हुए हैं। इसी कड़ी में सबसे चर्चा में रहा है पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत का मामला,जो कि अब कांग्रेस के साथ हैं। उनकी वापसी से होने वाले नफा-नुकसान का गुणा-भाग करने के बाद ही कांग्रेस पार्टी में उनकी एंट्री हुई है। ऐसे में पार्टी हरक के प्रभाव वाली गढ़वाल संसदीय क्षेत्र की सभी सीटों पर उन्हें बतौर स्टार प्रचारक मैदान में उतारे जानें के कयास भी लगने शुरू हो गए हैं। पार्टी उन्हें प्रदेश में बतौर स्टार प्रचारक भी उतार सकती है ऐसी खबरें भी आने लगीं हैं। 

इस विधानसभा चुनाव में बीजेपी पार्टी पर सियासी हमला बोलने के उद्देश्य से कांग्रेस पार्टी हरक सिंह को तुरुप के इक्के की तरह भी इस्तेमाल कर सकती है। भाजपा से निष्कासित किए जाने के पांच दिन बाद ही कांग्रेस पार्टी में एंट्री के साथ ही हरक सिंह रावत को पार्टी में लिए जाने से होने वाले नफा-नुकसान को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। वर्ष 2016 की घटना के बाद जिस तरह से पूर्व सीएम हरीश रावत और हरक सिंह रावत के बीच जुबानी जंग चली, उससे उनकी पार्टी में पुन: एंट्री को लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे थे। 

प्रदेश की 8 सीटों पर हरक की मजबूती-

आपको बतादें की हरक सिंह रावत  की गढ़वाल संसदीय क्षेत्र की आठ सीटों पर मजबूत पकड़ कही जाती है। जबसे उत्तराखंड राज्ये बना तबसे ही  लैंसडौन, रुद्रप्रयाग और कोटद्वार से वह विधायक रहे और  इन सभी सीटों के अलावा रुद्रप्रयाग, केदारनाथ, पौड़ी, श्रीनगर और चौबट्टाखाल क्षेत्र में उनकी अच्छी स्थिति है।  श्रीनगर उनका मौलिक क्षेत्र है और उन्होंने छात्र राजनीति का शुभारम्भ भी यही से किया है। 
हरक सिंह रावत वर्ष 2002 में कांग्रेस के टिकट पर लैंसडौन सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे। इसी सीट पर उन्होंने वर्ष 2007 के चुनाव में भी जीत दर्ज की। इसके बाद वर्ष 2012 के चुनाव में सीट बदलकर वह रुद्रप्रयाग जा पहुंचे। यहां भी उन्होंने अपनी सियासी धमक जारी रखते हुए जीत दर्ज की। 

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