कानपुर के चकेरी गांव निवासी किसान बाबू सिंह ने आत्महत्या नहीं बल्कि उन्हें मारकर फेका गया है। उन्हें पीट कर रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया गया। इसके बाद फर्जी सुसाइड नोट बनाया गया और के चलते आत्महत्या की कहानी बना दी गई। पुलिस को सच जानने के लिए सुसाइड नोट की फोरेंसिक जांच करानी चाहिए।
यह बात कही है प्रियरंजन आशु दिवाकर के पिता और भाई ने। उर्मिला के अंतिम संस्कार के बाद आशु के पिता रामप्रकाश ने मीडिया से कहा कि उनका बेटा पहले उर्सला में सर्जन था। वो राजनीती में आया। आशु ने तो बाबू सिंह के परिवार को बचाया, उन्हें जमीन वापस दिलाई थी। उन्होंने ये भी बताया है कि आशु को फंसाने के लिए विरोधियों ने सुसाइड नॉट लिख दिया।आशु का बेटा आतिश रंजन बोला कि उनके पिता के नाम बाबू सिंह की जमीन का एक टुकड़ा नहीं है। अगर पुलिस निष्पक्ष जांच करे तो पिता भी जांच में पूरा साथ देंगे।
आशु दिवाकर की फरारी बाद पुलिस टीम उसके घर में डेरा जमाए रही और बच्चो से पूछताछ करती रही। महिलाओं और बच्चों से पूछताछ कर रही थी। इससे बच्चे डिप्रेशन में आ गए। बच्चों पर दबाव बनाता देख आशु दिवाकर की बड़ी भाभी गीता ने विरोध किया, तो महिला दरोगा ने थप्पड़ मारा था।

