नई दिल्ली : आज देशभर में दशहरे की धूम है। विजयादशमी का त्योहार धूम धाम से मनाया जा रहा है। यह त्योहार असत्य पर सत्य के जीत के प्रतीक के रूप में हर वर्ष अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर भगवान राम ने लंका नरेश और महान ज्ञानी रावण को युद्ध में परास्त करके वध किया था। इसी तिथि पर मां दुर्गा ने महिषासुर नाम के दैत्य का संहार किया था। इसी कारण से विजयादशमी का त्योहार हर वर्ष रावण,मेघनाथ और कुंभकरण के पुतले का दहन करके मनाया जाता है। दशहरे के दिन पंडालों में स्थापित मां दु्र्गा की पूजा का समापन हो जाता है। दशहरे का महत्व और पूजा मुहूर्त बेहद खास है।
शुभ मुहूर्त-ज्तोतिष शास्त्र के मुताबिक साल भर में कुछ ऐसे त्योहार मनाए जाते हैं जिसमें किसी भी तरह का शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखकर ही पूजा की जाती है। दशहरा की तिथि यानी अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को एक अबूझ मुहूर्त माना गया है। अबूझ मुहूर्त में सभी तरह के शुभ कार्य, शुभ खरीदारी और अनुष्ठान किए जाते है। विजयादशमी पर ही 10 दिनों तक चलने वाले युद्ध में मां भगवती ने महिषासुर का वध किया था।

