सीईईडब्ल्यू- यूएसडीएमए और एसडीसी फाउंडेशन की तरफ अर्ली वार्निंग सिस्टम पर कार्यशाला  

देहरादून: देहरादून के मेयर श्री सुनील उनियाल गामा ने  बीते दिन बुधवार को सीईईडब्ल्यू-यूएसडीएमए और एसडीसी फाउंडेशन की तरफ से जलवायु परिवर्तन और अर्ली वार्निंग सिस्टम पर एक कार्यशाला का आयोजन हुआ। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला बेहद जरूरी है और यह देश, प्रदेश और शहर के स्तर पर आपदा से निपटने की तैयारियों को एकीकृत करने की जरूरत को दर्शाती है। राज्य में जंगलों में आग लगने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और बाढ़ व सूखे जैसी स्थितियों को राज्य के विकास में बड़ी बाधा बताया। हितधारकों को एक साथ लाने के लिए इस कार्यशाला के आयोजकों को शुभकामनाएं भी दीं ।


उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर और सोशल डेवलपमेंट फॉर सोसायटी फाउंडेशन ने 15 जून, 2022 को संयुक्त रूप से देहरादून में एक वर्कशॉप ऑर्गेनाइज की गई जिसके बाद इसमें ‘हाउ कैन वी मेक उत्तराखंड क्लाइमेट रिज़िलियंट’ शीर्षक से आयोजित समूह चर्चा  में श्री सुनील उनियाल गामा ने अपना मुख्य अभिभाषण दिया। इस चर्चा में भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र और आपदा न्यूनीकरण एवं प्रबंधन केंद्र के कार्यकारी निदेशक डॉ.पीयूष रौतेला भी शामिल हुए।
 मुख्य रूप से सीईईडब्ल्यू के क्लाइमेट रिस्क एटलस (सीआरए) और डिसिज़न सपोर्ट टूलकिट की मदद से कमजोर समुदायों को सुरक्षा देने और आवास, परिवहन व उद्योगों जैसे बुनियादी ढांचों में निवेश करने के उपायों पर ज्यादा प्रभाव में रही। 2021 में जारी सीईईडब्ल्यू के क्लाइमेट वल्नरेबिलिटी इंडेक्स (सीवीआई) के अनुसार, उत्तराखंड बाढ़ जैसी मौसम की चरम घटनाओं के लिए बेहद संवेदनशील है और पिछले एक दशक में जलवायु संबंधी ऐसी चरम घटनाओं से होने वाले नुकसान में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा, “आईएमडी जलवायु संबंधी सूचनाओं को लोगों के अनुकूल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम प्रभावी अलर्ट सिस्टम तैयार करने के लिए कदम उठा रहे हैं। उत्तराखंड, एक जलवायु-संवेदनशील राज्य है और आईएमडी मौसम संबंधी सूक्ष्म  जानकारियों व चेतावनियों को उपलब्ध कराने के लिए सारे प्रयास कर रहा है।


 सीईईडब्ल्यू के प्रोग्राम लीड श्री अबिनाश मोहंती ने इस कार्यक्रम में कहा, “पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की ओर से पिछले साल किए गए अध्ययनों ने दिखाया कि हिंदू कुश हिमालय ने 1951-2014 के दौरान तापमान में लगभग 1.3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी का सामना किया है। मौसम में बढ़वार की वजह से उत्तराखंड में सूक्ष्म जलवायु परिवर्तनों और ग्लेशियर के सिकुड़ने की रफ्तार को बढ़ाया है, जिसके परिणामस्वरूप अचानक आने वाली बाढ़ की आवृत्ति और निरंतरता बढ़ रही है। 
इसके अलावा एसडीसी फाउंडेशन के संस्थापक, श्री अनूप नौटियाल ने कहा, “मैं उत्तराखंड आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, सीईईडब्ल्यू और सभी संबंधित विभागों का उनकी ओर से दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों के लिए हृदय से आभार प्रकट करता हूं। ये सभी सुझाव, निश्चित रूप से उत्तराखंड में आपदाओं को घटाने में मदद करेंगे।”
इस आयोजित कार्यशाला में कार्यक्रम में सम्मिलित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में श्री एसटीएस लेप्चा, आईएफएस (सेवानिवृत्त) और वरिष्ठ सलाहकार, एसडीसी फाउंडेशन; सुश्री रेचेल जायनफ्रेंची, सरकारी मामलों की प्रमुख, एवरब्रिज; और श्री सुमित अग्रवाल, निदेशक, सेल्स पब्लिक सेफ्टी एशिया प्रशांत, एवरब्रिज,आदि प्रमुख थे।

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