भाजपा ने दिल्ली में खेला पंजाबी कार्ड,जानिए किसे बनाया अध्यक्ष

नई दिल्लीं : 2009-2010 में 11 महीने के छोटे से कार्यकाल को छोड़ दें तो बीस साल में बीजेपी का दिल्ली में कोई भी पंजाबी’ प्रदेश अध्यक्ष नहीं रहा है। 13 साल में पांच प्रदेश अध्यक्षों में बीजेपी में तीन ‘बनिया’ और दो ‘ब्राह्मण’ को शामिल किया। इनमें एक पूर्वांचली ब्राह्मण सांसद मनोज तिवारी भी शामिल हैं। दिल्ली बीजेपी के इस शीर्ष पद के लिए किसी पंजाबी उम्मीदवार पर विचार क्यों नहीं किया गया? यह उस समुदाय के बीच गंभीर चिंता का विषय रहा जिसने मदन लाल खुराना, वीके मल्होत्रा, केदार नाथ साहनी जैसे दिग्गजों को पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में देखा।
दिल्ली में 25 साल से सत्ता से बाहर रहने वाली बीजेपी ने तीन विधानसभा चुनावों में अपने पंजाबी आधार में धीरे-धीरे गिरावट देखी। इससे दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को बड़ा फायदा मिला जिससे उनको लगातार तीन चुनावों में जीत मिली। देर से ही सही, मगर बीजेपी का पंजाबियों के साथ का अलगाव तब पूरा हुआ जब उसने 15 साल बाद न केवल दिल्ली नगर निगम में बहुमत खो दिया बल्कि पश्चिमी दिल्ली और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पंजाबी बाहुल्य गढ़ में प्रभावी रूप से उसका सफाया हो गया। और आज 55 साल के वीरेंद्र सचदेवा को बीजेपी ने दिल्ली में एक पूर्णकालिक प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया। जो कि पंजाबी समाज से आते है।
सचदेवा के राजनैतिक जीवन की बात करें तो उन्होंने 1988 में चांदनी चौक के सीता बाजार इलाके में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समिति प्रमुख के रूप में शुरुआत की थी। वह युवा मोर्चा महामंत्री से मंडल मंत्री और मंडल महामंत्री बनने के बाद जिला मंत्री बने. फिर वह चांदनी चौक के जिलाध्यक्ष बने.वह मयूर विहार में आए और पूर्वी दिल्ली के जिलाध्यक्ष बन कर एक के बाद एक सीढ़ी चढ़ते गए।