इस बार दिवाली के ठीक दूसरे दिन गोवर्धन अन्नकूट की पूजा नहीं मनाई गई क्यूंकि सूतक और सूर्य ग्रहण पड़ा। इसलिए आज बुधवार को दोपहर करीब 2 बजकर 45 मिनट तक ही परेवा तिथि थी जिसके बाद अब भाई दूज के पर्व शुरू हो चूका है। हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। भाई दूज के मौके पर बहन भाई के माथे पर टीका करती है। आरती उतारकर उनकी लंबी आयु के लिए भगवान से कामना करतीं हैं।यह भी कहा जाता है कि दूज के दिन बहनों के घर भोजन करने से भाई की उम्र लम्बी होती है। इस साल भाई दूज के पर्व की तिथियों को लेकर उलझन है कि इस साल भाई दूज का पर्व दो दिन यानी 26 और 27 अक्तूबर को मनाया जाएगा। लोग उदया तिथि को मानते हैं, वहां पर 27 अक्तूबर को भी भाई दूज की पूजा कर सकते हैं।
ज्योतिषाचार्य आचार्य के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि, जिस दिन दोपहर के समय होती है, उसी दिन भाई दूज का त्योहार मनाना चाहिए। इसी दिन यमराज, यमदूत और चित्रगुप्त की पूजा करनी चाहिए और इनके नाम से अर्घ्य और दीपदान भी करना चाहिए।अगर दोनों दिन दोपहर में द्वितीय तिथि हो तब पहले दिन ही द्वितीय तिथि में भाई दूज का पर्व मनाना चाहिए।27 अक्तूबर को दोपहर एक बजकर 18 मिनट से तीन बजकर 30 मिनट तक रहेगा।

