World Mental Health Day :बच्चों में मोबाइल की लत, करते हैं ऐसी हरकतें- हो सकती है बड़ी परेशानी

आज कल के समय में जहां अभिभावक कामनें के लिए रात दिन भाग दौड़ में लगे हुए हैं वहीँ, घर में बच्चो के ऊपर एक नकारात्मक प्रभाव भी दिख रहा है कि बच्चे मोबाइल के इतने आदी हो गए हैं कि सारा फ्री समय बस मोबाइल के साथ ही बिताना चाहते हैं। अब बात यहां तक आ चुकी है कि इसका दुष्प्रभाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।

चाहे अभिभावक नौकरी पेशे वाले हो या नहीं लेकिन हर घर में बच्चों में मोबाइल की लत लगी हुई है। फोन में कार्टून देखना, गेम खेलना और यूट्यूबर बनने की लत बच्चों को बेहद अपनी ओर खींच रही है। मोबाइल न मिले तो वह अजीब हरकतें करने लगते हैं। कभी अपना सिर दीवार पर पटकते तो कभी मोबाइल न मिलने पर रोने चीखने -बिलखने भी लग जाते हैं ।
 
यहां तक की अपने आप को चोट पहुंचाने लगते हैं। ये बेहद सोच का विषय बन गया है। बच्चों के दिमाग में हो रही यह उथल पुथल देखकर माता-पिता भी परेशान हैं कि कहीं उनके लाडलों को कोई बीमारी तो नहीं है। अभिभावक बच्चों को मनोचिकित्सक के पास ले जाना पड़ रहा है। जहां से सामने आया है कि बच्चे मोबाइल फोन की लत लगने की वजह से बिहेवियरल डिसऑर्डर के शिकार हैं। ऐसे में बच्चों के साथ माता-पिता की भी काउंसलिंग करनी पड़ती है।
बहुचर्चित मनोचिकित्सक डॉ. निशा सिंगला बताती हैं कि मोबाइल गेम की लत बच्चों को बेहद खराब करती जा रही है मानसिक रूप से बच्चे बीमारी का शिकार हो गए। फोन न पाने पर बच्चे अजीब हरकते करते हैं। कभी उनका गला दबाने की कोशिश करते हैं तो कभी खुद को नुकसान पहुंचाते हैं। अस्पतालों में ऐसे मामलें भी सामने आए हैं कि बच्चे से अकेले में पूछा तो बताया कि यह सब नाटक इसलिए किया, ताकि उन्हें नया मोबाइल फोन मिल सके। और उन्हें युट्यूबर बनना है।
केस – यह मामला है एक परिवार में हाईस्कूलमें पढ़ रहे छात्र का। जो कि मोबाइल में गेम खेलने का इतना आदी था कि  यूट्यूबर बनने का शौक पाल बैठा। नया मोबाइल फोन लेने के लिए वह अजीब हरकतें करता है कभी अपना सिर दीवार पर पटकता तो कभी माता-पिता से लड़ता झगड़ता भी है।
इसका इतना ही दुष्प्रभाव नहीं है कि बल्कि मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल की वजह से बच्चे छोटी उम्र में बोलना नहीं सीख पा रहे हैं। अपने आपको खुलकर एक्सपोज न कर पाना, खेल न पाने जैसी दिक्कतें आ रही हैं। यह परेशानी अधिकतर 6 तक के बच्चो में ज़्यादा दिख रही है।
कैसे बचें –
बच्चो के लिए समय दे. माँ बाप को बच्चो से खुलकर बात करना चाहिए। उनके साथ रात को कहानिया डिस्कस करें ताकि वो भी अपने मन का कुछ कहे और जाता सकें। घर का माहौल अच्छा रखें। बच्चा जो भी सीखता है घर से ही सीखाता है। अगर माता-पिता दोनों वर्किंग हैं तो एक लोग बच्चे के लिए समय निकालें। कोई ऐसा समय हो जहां माँ बाप भी मोबाइल इस्तेमाल न करे। जिन माता-पिता के बच्चे छोटे हैं, वो शुरुआत से ही उन्हें मोबाइल फोन से दूर रखें। बच्चों के साथ बातें करें।

लक्षण
– कम बोलना
– हर समय रोते रहना
– जिद करना
– गुस्सा करना
– खुद को पीटना
– बातें सब सुनना, लेकिन किसी भी बात को न बोलना पाना
– अपने से बड़े माता-पिता को पीटना
– हाथ पैर पटकना

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *