आंखों के कैंसर को मात देकर सामान्य जिंदगी में वापस लौटे बच्चों को एम्स ब्रांड एंबेसडर घोषित किया है। इनमें से कई बच्चों ने इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेज में दाखिले की परीक्षा भी दी है। अब यह आंखों के कैंसर रेटिनोब्लास्टोमा की टारगेट थेरेपी को प्रोत्साहित करेंगे। ब्रांड एंबेसडर बनेंगे जिससे वो मरीजों के साथ मेडिकल संस्थानों को भी राह दिखाने का काम करेंगे।
एम्स प्रशासन ने कहा है कि जल्द ही इनको ब्रांड एंबेसडर बनाकर एम्स से जोड़ा जाएगा। एम्स दिल्ली में ही टारगेट थेरेपी से रेटिनोब्लास्टोमा के उपचार की सर्विस उपलब्ध है। हर साल देश में दो हजार से अधिक बच्चों में यह समस्या है। सरकारी संस्थान होने से एम्स में मरीजों का दबाव ज्यादा है। आंखों की रोशनी जाने से लेकर मरीज की मौत तक हो जाती है। ऐसे में एम्स प्रशासन इस थेरेपी को दूसरे एम्स व सहित देश के अन्य संस्थानों में प्रमोट करने की योजना तैयार की है।10 साल में एम्स इस विधि से 170 बच्चों का सफल इलाज कर चुका है। इसमें जांघिक धमनी के रास्ते एक कैथेटर को नेत्र धमनी से होते हुए आंख हिस्से तक पहुंचाया जाता है,

