लखनऊ : आज बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने उत्तर प्रदेश के 28 अधिवक्ताओं को ‘फर्जी दावा मामले दर्ज करने के आरोप में लिप्त पाने के बाद निलंबित कर दिया है। बीसीआई ने अपने इस फैसले को अधिसूचित कर दिया।
बार काउंसिल की यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के बाद हुई है। जिसमें यूपी/एसआईटी को उन अधिवक्ताओं के नाम देने का आदेश था जिनके खिलाफ मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण और कामगार मुआवजा अधिनियम के तहत फर्जी दावे करते हुए याचिका दायर करने वाले संज्ञेय अपराधों के मामलों का प्रथम दृष्टया खुलासा किया गया है ताकि बीसीआई की कार्रवाई को आगे बढ़ाया जा सके।
आज बार काउंसिल ने जितने भी अधिवक्ताओं को हटाया है। उनमें एसआईटी द्वारा उपलब्ध कराए गए उन नामों की सूची है। जिनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है और आरोप पत्र दायर किया गया है। बीसीआई की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार बार काउंसिल ने गहन विचार-विमर्श के बाद 28 ऐसे अधिवक्ताओं को, जिनके नाम एफआईआर/चार्जशीट में हैं।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को इन अधिवक्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने तथा तीन महीने की अवधि के भीतर जांच समाप्त कर उसकी रिपोर्ट बार काउंसिल ऑफ इंडिया को प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

