आइये यहां पढ़िए सीतापुर मर्डर केस का पूरा सच, कैसे खुद के भाई ने भाई का परिवार किया खत्म

सीतापुर में बीते शनिवार बेहद दर्दनाक मामला सामने आया था जिसमें सभी को लगा था कि एक पिता ने खुद ही अपने बच्चों मारा था और बीवी को मारा था और खुद खुदखुशी कर ली थी। लेकिन ये सब सुसाइड नहीं था बल्कि छह लोगों की हत्या हुई थी। घटना की सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस परिजनों के दावों से गुमराह होकर गलत दिशा में जांच करने लगी थी। डीजीपी प्रशांत कुमार ने आईजी रेंज लखनऊ तरुण गाबा को मौके पर भेजा, जिसके बाद अब पुलिस इसे हत्या का मामला समझकर अब सही से जांच कर रही है।

सीतापुर पुलिस बीते शनिवार को हुई घटना की वजह का पता लगाने में नाकाम हो रही थी। परिजनों से मिली जानकारी के बाद इसे सुसाइड का केस समझकर इसकी तफ्तीश शुरू की गई।करीब दो घंटे बाद असलहा बरामद होने के बाद भी वारदात की कड़ियों को आपस में नहीं जुड़ीं और सही से दुबारा जाँच शुरू हुई।

कैसे हुआ पुलिस को शक –
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अनुराग सिंह के सिर में दो गोलियां मिलने के बाद डीजीपी मुख्यालय हरकत में आया। एसपी सीतापुर से जवाब तलब करने पर साफ हो गया कि यह सुसाइड का मामला नहीं है।  संपत्ति विवाद में वारदात अंजाम दिए जाने के संकेत मिल रहे हैं, जिस गहनता से खंगाला जा रहा है। शक के दायरे में कुछ करीबी परिजन हैं।
ये है कहानी –
ग्रामीणों ने बताया है कि स्व. वीरेंद्र सिंह के दो बेटे अनुराग सिंह व अजीत सिंह पिता की विरासत संभालते थे। अनुराग खेती में रुचि रखता था। अजीत सिंह प्राथमिक विद्यालय बरी, जगतपुर महमूदाबाद में सरकारी अध्यापक हैं। उधर अनुराग सिंह आधुनिक ढंग से सब्जियों की खेती भी करता था। उसके पिता वीरेंद्र और आरपी सिंह भी दो भाई थे। आरपी सिंह बड़े भाई थे। वहीं वीरेंद्र छोटे। जब वह एक साथ रहते थे तो उस समय जो भी जमीन व घर खरीदे गए उसे आरपी सिंह चालाकी से अपने और अपनी पत्नी के नाम कराने का प्रयास करते रहे। ग्रामीणों की मानें तो इस धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब वीरेंद्र ने अपनी पुत्री निशा का विवाह कमलापुर से किया। वहीँ उन्होंने लखनऊ के विकासनगर में खरीदा गया प्लॉट भी दहेज में दे दिया तब उसे लगा कि लखनऊ के खुर्रमनगर में खरीदे गए प्लाट में अभी उन्हें आधा हिस्सा तो मिल जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विवाद बढ़ा तो आरपी सिंह और वीरेंद्र के बीच 2016-17 में खेत का बंटवारा हो गया था जिसके बाद अनुराग नशा करने लगा था। 2023 में वीरेंद्र की हार्ट अटैक से मौत हो गई। सभी ने बताया है कि अनुराग ने शराब का सेवन कम कर दिया था। मामले की जांच कर रही एसओजी ने जब हिरासत में लिए गए अजीत और अन्य लोगों से पूछताछ की तो कई तथ्य सामने आए। इसके बाद अजीत ने वारदात को अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली।
एसपी सीतापुर चक्रेश मिश्र ने करीब 24 घंटे बाद अपने उस ट्वीट को डिलीट कर दिया, जिसमें उन्होंने अनुराग को मानसिक रूप से विक्षिप्त बताया था। वह अनुराग को शराब का आदी भी मान बैठे थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *