प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हर उत्तराखंड यात्रा को ध्यान दिया जाए तो राजनीतिक और प्रशासनिक न होकर एक आध्यात्मिक यात्रा बन जाती है लेकिन राजनीतिक सक्रियता और प्रधानमंत्री बनने के पहले से उनका उत्तराखंड से आध्यात्मिक जुड़ाव साफ़ दिख रहा है। इसका कारण है कि उत्तराखंड में उनके भाषण में एक प्रधानमंत्री और भाजपा के शीर्ष नेता से अधिक आध्यात्मिक पहलू कहीं अधिक उभरकर देखा जाता है। बतौर प्रधानमंत्री देश की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के पुनर्निर्माण पर लगातार बल देकर उभरी जातिगत राजनीति से सनातन को होने वाले नुकसान का संदेश भी इस यात्रा में हैं।एक बार फिर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड से जो आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ आये हैं। प्रधानमंत्री का केदारनाथ की ध्यान गुफा में ध्यानमग्न मुद्रा का चित्र देश के लोगों के मानस पटल में छप सा गया है।
पीएम मोदी का के शंख की गूँज से प्रदेश को खास संदेश

