हरिद्वार। आज विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महामंत्री श्री चंपत राय ने अपने हरिद्वार दौरे के अंतिम दिन प्रेस क्लब हरिद्वार द्वारा आयोजित कार्यक्रम “प्रेस से मिलिये” कार्यक्रम में शामिल हुए,प्रेस क्लब हरिद्वार के अध्यक्ष राजेंद्र नाथ गोस्वामी व महासचिव राजकुमार द्वारा चम्पतराय जी का मालार्पण कर शॉल भेट करके सम्मान दिया गया।
क्या बोले चंपत राय —आज शुक्रवार आयोजित इस कार्यक्रम में प्रेस को अयोध्या में निर्माणाधीन श्री राम मंदिर के बारे में बताते हुए कहा कि 500 वर्षों से भी ज्यादा के संघर्ष और कोशिशों और आंदोलन के बाद भव्य राम मंदिर निर्माण शुरू किया जा चुका हैं. अयोध्या के रामकोट मुहल्ले में एक टीले पर लगभग 500 साल पहले 1528-1530 में बने निर्माण पर लगे शिलालेख के मुताबिक़ यह मुगल बादशाह बाबर के आदेश पर उसके गवर्नर मीर बाकी ने तैयार करवाया था। इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है कि बाबर अथवा मीर बाकी ने यह जमीन कैसे हासिल की और निर्माण से पहले वहां क्या था? कहा जाता है कि इस निर्माण को लेकर हिंदुओं और मुसलमानों में कई बार विवाद हुए कई संघर्ष किए गए। आपको बतादें की मंदिर के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा कि 1949 में हिंदुओं ने उक्त ढांचे के केंद्र स्थल पर रामलला की प्रतिमा रखकर पूजा-अर्चना शुरू की थी। विश्व हिंदू परिषद ने 1984 में विवादित ढांचे के ताले खोलने, राम जन्मभूमि को स्वतंत्र कराने और यहां मंदिर निर्माण के लिए एक अभियान शुरू किया।
अयोध्या के उस स्थल पर मालिकाना हक को लेकर साल 2002 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन न्यायधीशों की खंडपीठ ने सुनवाई शुरू की। मार्च-अगस्त 2003 में हाईकोर्ट से मिले निर्देश पर पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने विवादित स्थल पर खुदाई की। विभाग ने दावा किया कि खुदाई में विवादित ढांचे के नीचे मंदिर के अवशेष होने के प्रमाण मिले हैं। 2011 में मामले की सुनवाई कर रही इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने विवादित क्षेत्र को रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड को बराबर तीन हिस्सों में बांटने का फैसला दिया। यह फैसला सभी पक्षों को स्वीकार नहीं था।
ऐसे में फरवरी 2011 में हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तो शुरू हो गई, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट से भेजे गए दस्तावेजों का अनुवाद नहीं हो पाने के कारण यह मामला टलता रहा। दशकों के संघर्ष के बाद अयोध्या में मंदिर निर्माण की अनुमति मिल पाई है.
देवस्थानम बोर्ड पर क्या बोले ? –
देवस्थानम बोर्ड पर चंपत राय ने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद का यह सुविचारित मत है कि हिन्दू मंदिरों का संचालन पूर्णता हिन्दू समाज को ही करना चाहिए। सरकारी कब्जे से मंदिरों को मुक्ति मिलनी चाहिए। मंदिरों की संपत्तियों, वहाँ आये हुए दान का हिन्दुओं के लिए, मंदिर के रखरखाव के लिए तथा हिन्दू धार्मिक प्रचार के लिए उपयोग हो। “सेक्युलर” होकर भी केवल हिन्दू धर्मस्थानों को व्यवस्था के नाम पर दशकों शतकों तक हड़प लेना, अभक्त, अधर्मी, विधर्मी के हाथों उनका संचालन करवाना आदि अन्याय दूर हों। हिन्दू मंदिरों का संचालन हिन्दू भक्तों के ही हाथों में रहे तथा हिन्दू मंदिरों की सम्पत्ति का विनियोग भगवान की पूजा तथा हिन्दू समाज की सेवा तथा कल्याण के लिए ही हो, यह भी उचित व आवश्यक है। इस विचार के साथ ही हिन्दू समाज के मंदिरों का सुयोग्य व्यवस्थापन तथा संचालन करते हुए, मंदिर फिर से समाज जीवन के और संस्कृति के केन्द्र बनाने वाली रचना हिन्दू समाज के बल पर कैसी बनाई जा सकती है, इसकी भी योजना आवश्यक है।
ये लोग रहे मौजूद –
इस दौरान चम्पतराय जी के साथ विहिप के केंद्रीय मंत्री अशोक तिवारी, प्रान्त उपाध्यक्ष प्रदीप मिश्रा,प्रान्त संगठन मंत्री अजय कुमार,प्रान्त प्रचार प्रमुख पंकज चौहान,प्रान्त प्रवक्ता वीरेंद्र कीर्तिपाल,बजरंग दल सयोजक अनुज वालिया, जिलाध्यक्ष नितिन गौतम, मंत्री भूपेंद्र चौहान, मयंक चौहान के अलावा प्रेस क्लब के संस्थापक अध्यक्ष डॉ.शिवशंकर जायसवाल, डॉ रजनीकांत शुक्ला, अमित शर्मा, अविक्षित रमन, संजय आर्य, मुदित अग्रवाल, रविन्द्र सिंह, विकास चौहान, मुकेश वर्मा आदि प्रेस क्लब के सदस्य मुख्य रुप से उपस्थित थे।

