लखनऊ : उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों नें कमर कस ली है। और इसीलिए सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा नें अब ओबीसी वोटरों को साधना शुरू कर दिया है। विधानसभा चुनाव से पहले जहां कई ओबीसी नेताओं ने भाजपा को छोड़ सपा का दामन थामा तो भाजपा ने इस डेमज को कंट्रोल करने के लिए ओबीसी वर्ग से 60 फीसदी से अधिक प्रत्याशी चुनाव में उतारें हैं। भाजपा ओबीसीमोर्चें के साथ विधानसभा क्षेत्र में बैठकों का आयोजन करने जा रही है। चुनाव आयोग की ओर से 500 लोगों की मौजूदगी में इंडोर मीटिंग की इजाजत दिए जाने के बाद भाजपा के ओबीसी मोर्चा ने उत्तर प्रदेश के हर विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं को लोगों के बीच जाने केलिए कहा है।भाजपा ओबीसी मोर्चा ने घोषणा की है कि वह 300-300 लोगों के साथ हर विधानसभा क्षेत्र में बैठकों का आयोजन किया जाएगा. भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रमुख लक्ष्मण ने कहा, ”हमने यूपी में मोर्चा की टीम बनाई है।
प्रदेश में इन दिनों सभी राजनीतिक पार्टियां सभी छोटी जातियों के वोटों को अपने में मिलाने के लिए मेहनत कर रही है।भाजपा ने तो दावा किया है कि पिछड़ी जातियों के 60 फीसदी वोट में से ज्यादातर वोट उनके पास ही आने है। भाजपा के अलावा अन्य पार्टियां भी यही दावा कर रही हैं कि पिछड़ी और दलित जातियों उनके साथ हैं। एक अनुमान के अनुसार प्रदेश में सबसे बड़ा वोट बैंक पिछड़ा वर्ग का है। लगभग 52 फीसदी पिछड़ा वोट बैंक में 43 फीसदी वोट बैंक गैर-यादव बिरादरी का है, जो कभी किसी पार्टी के साथ स्थाई रूप से नही रहता ।

