हरिद्वार कुंभ मेले में कोरोना जांच के नाम पर हुआ घोटाला उत्तराखंड सरकार की गले की फांस बन गया है | महामारी के दौरान हुआ यह जानलेवा घोटाला जहां देश भर में राज्य को शर्मसार कर रहा है वहीं एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि सब की नाक के नीचे हुए इस घटनाक्रम की भनक मुख्यमंत्री सहित कई मंत्रियों व बड़े अफसरों तक को कैसे नहीं लगी |
कुंभ 2021 के दौरान हरिद्वार आए श्रद्धालुओं की कोरोना जांच के लिए दिए गए ठेके में बड़ी गड़बड़ी सामने आई थी। मामला बढ़ता देख शासन ने एफ आई आर दर्ज कराकर जांच हेतु एसआईटी का गठन किया था। हालांकि मामले की जांच अभी जारी है लेकिन मामला लोगों की जिंदगी से जुड़ा होने के कारण मेला प्रशासन से लेकर सरकार तक हर किसी पर सवाल खड़े हो रहे हैं |
आश्चर्य की बात यह है कि मेले की तैयारियों के लिए दो दर्जन से ज्यादा उच्च स्तरीय बैठकें हुई थी | जिनमें तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तब के शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक मंत्री सतपाल महाराज समेत राज्य के मुख्य सचिव तक शामिल थे | ऐसे में महत्वपूर्ण बात यह है कि कैसे कोरोना जाँच का ठेका एक अयोग्य कंपनी को दिए जाने की किसी को भनक तक नहीं लगी। एसआईटी की जांच में इस बिंदु को भी शामिल किया जाना चाहिए कि क्या कंपनी को ठेका दिलाने में किसी अफसर या मंत्री की तो भूमिका नहीं थी |
बरहाल वर्तमान मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत इस विवाद की गेंद को भले ही पिछले सीएम के पाले में डालने को आतुर हो लेकिन आरोपों के छींटें समुचित सरकार की छवि धूमिल कर रहे हैं |

