हरिद्वार की मेयर अनीता शर्मा उस समय बाल-बाल बच गई जो जब वो नगर निगम स्थित अपने कार्यालय में एक बैठक ले रही थी।
दरअसल, शहर में बढ़ते कोरोना संक्रमण व सफाई व्यवस्था को लेकर मेयर अपने कार्यालय में अधिकारियों व पार्षदों के साथ बैठक कर रही थी। तभी उनके कार्यालय की सीलिंग व उस पर लगी लाइटें भर-भराकर गिर गयी। गनीमत ये रही कि इस घटना में मेयर व वहां मौजूद किसी को भी चोट नहीं आयी।
उधर इस घटना के लिये मेयर प्रतिनिधि अशोक शर्मा ने नगर विधायक व पूर्व शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक को कसूरवार ठहराया है। उनके अनुसार कौशिक पिछले 20 वर्षों से नगर के विधायक हैं व साढे 9 साल वो प्रदेश के शहरी विकास मंत्री रहे हैं। लेकिन सैकड़ों वर्ष पुरानी हरिद्वार नगर निगम की बिल्डिंग का न तो जीर्णोद्धार हुआ और न ही निगम को नया कार्यालय मिला।
अशोक शर्मा ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखकर आरोप लगाया कि देहरादून व ऋषिकेश निगमों के पास तो अपने नए कार्यालय हैं लेकिन हरिद्वार जहां कौशिक इतने वर्षों से विधायक हैं वहां के निगम की हालत खराब है।

