बीते दिन मंगलवार को नेपाल में आए भूकंप का प्रभाव अधिकतर राज्यों में रहा इसका असर उत्तराखंड के कई शहरों में महसूस किया गया है। वाडिया हिमालय भू-विज्ञान संस्थान ने बताया है कि छह मैग्नीट्यूड तीव्रता का भूकंप किसी बड़ी तबाही को बचा गया। धरती के नीचे इंडियन और यूरेशियन प्लेट के आपस में टकराने से काफी ऊर्जा संगृहीत है इस तरह के छोटे भूकंप आने से जमा ऊर्जा का ह्रास जाता है।
बड़े भूकंप का खतरा टलता है लेकिन ख़तरा बना रहता है। इस तीव्रता के भूकंप को धरती के नीचे चल रही हलचल के लिहाज से सकारात्मक तौर पर लिया गया उन्होंने बताया कि इंडियन और यूरेशियन प्लेट के टकराने के प्रभावों का जीपीएस के माध्यम से अध्ययन किया गया। इसमें पाया गया कि धरती के नीचे बड़ी मात्रा में एनर्जी स्टोर है।
इसलिए इस एनर्जी का रिसाव भी जरुरी है। अन्यथा यह बड़े भूकंप का खतरा ला सकती है। प्लेटों के आपस में टकराने से धरती के नीचे फ्रैक्चर हो गया है। उत्तराखंड के कई जिले लाक जोन में हैं। इस कारण यहां पर एनर्जी बाहर नहीं निकल पाई है इसलिएकम तीव्रता के भूकंप से एनर्जी स्टोरेज कम होगा, तो बड़े भूकंप का खतरा टल जाएगा। लेकिन यह कब आएगा, इसे कहा नहीं जा सकता।

