ऋषिकेश: प्रदेश में अपनी भांजी के इलाज की गुहार लगाए मामा की कोई नहीं सुन रहा। दरअसल,ऋषिकेश एम्स में एक व्यक्ति की भांजी इस समय कोमा में है। बड़ी सिफारिश के बाद भी एम्स ऋषिकेश में सही इलाज नहीं दिया जा रहा है। मीडिया पार्टीका को एक रिश्तेदार ने संदेश भेजा है जिसमें उन्होंने बस हादसे में गंभीर घायलों के इलाज में बरती जा रही लापरवाही को सूचित किया है।उन्होंने अपने संदेश में लिखा, मेरी भांजी अंजलि (18 वर्ष) बस दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी। भांजी के पिता की दुर्घटना में मृत्यु हो गई और भाई भी घायल हुआ। भांजी एम्स में भर्ती है और कोमा में है। बहुत सिफारिश के बावजूद एम्स में सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। संपर्क करने पर परिजन ने अमर उजाला को बताया कि पहले तो दवाइयां वहीं से दी जा रही थीं, अब दवाइयां भी बाहर से लिखी गई है और वो बहुत ही महंगी है। मेरी बहन भी वहां अकेली है उसे दिक्कत हो रही है। उन्होंने सवाल किया कि जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सारा इलाज सरकारी खाते से कराने की घोषणा की थी तो डॉक्टर बाहर से दवाइयां लाने के लिए क्यों कह रहे हैं?
सीएम की घोषणा पर अमल नहीं – मुख्यमंत्री ने मृतक आश्रितों को दो लाख, ज्यादा गंभीर घायलों को एक लाख, और घायलों को 50 हजार रुपये देने की भी घोषणा की थी। उसमें घायलों को 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि देने की जानकारी प्राप्त हो रही है।

