इस समस्या के लिए सरकार ने यू कोट वी पे योजना शुरू की है। योजना के तहत दो चरणों में हुए साक्षात्कार में स्वास्थ्य विभाग को 46 हड्डी रोग, बाल रोग, स्त्री रोग जनरल सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, एनेस्थीसिया मिले हैं। प्रदेश भर के अस्पतालों में की गई। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग में कार्डियोलॉजी और न्यूरो सर्जन की कमी है। कार्डियोलॉजी व न्यूरो सर्जन में सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टर के लिए कोई आवेदन नहीं मिला है। जल्द ही दोबारा से आवेदन की मांग होगी।
प्रदेश में डॉक्टरों की किल्लत,छह लाख का ऑफर
प्रदेश में कार्डियाेलॉजिस्ट, न्यूरो सर्जन के साथ सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टर की कमी दूर नहीं की जा सकी है। सरकार ने प्रति माह छह लाख रुपये का मानदेय देने की भी घोषणा की थी लेकिन एक भी सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टर नहीं तैयार हुए। संविदा पर सुपर स्पेशियलिस्ट पहाड़ों में सेवाएं देने के लिए तैयार नहीं हुए हैं। इससे सरकार भी हताश हुई है। प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टर के लगभग 1,100 पदपर हैं। इसमें 56 प्रतिशत पद रिक्त हैं। एमबीबीएस डॉक्टर तो हैं लेकिन जो अहम परेशानी है वो है विशेषज्ञ और सुपर स्पेशियलिस्ट डॉक्टर की जो पूरी नहीं हो पा रही है।

