इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जरूरी फैसले लेते हुए कहा है कि कोर्ट द्वारा पुलिस रिपोर्ट पर संज्ञान लेने के बाद भी एसपी द्वारा केस की विवेचना दूसरे थाना पुलिस को सौंपी जा सकती है। जिसके लिए न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी आवश्यक होगी। न्यायलय ने ये भी कहा है कि मजिस्ट्रेट के पुलिस को फिर से विवेचना करने का अधिकार इससे प्रभावित नहीं होता है क्योंकि मजिस्ट्रेट के लिए पुनर्विवेचना का आदेश देने के लिए सभी अभियुक्तों को पूरी तरह जानना बेहद जरूरी तथ्य है।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पुलिस रिपोर्ट के संज्ञान के बाद भी अब होगा ऐसा
आपको बतादें कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173 (8) के अंतर्गत मामलें की विवेचना अन्य पुलिस को स्थानांतरित करने के लिए मजिस्ट्रेट की फार्मल अनुमति लेनी कोई जरुरी नहीं है। एसपी केस की विवेचना स्थानांतरित करने का अधिकार रखता है। कर सकता है। कोर्ट ने एसपी देवरिया के दाखिल चार्जशीट पर मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान लेने के बाद दूसरे थाना पुलिस को अकारण विवेचना करने का आदेश देने की वैधता की चुनौती याचिका को बलहीन मानते हुए खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति उमेश चंद्र शर्मा ने राम कोमल व दो अन्य की धारा 482के अंतर्गत दाखिल याचिका पर सुनाया है। शिकायतकर्ता ने एसपी देवरिया को विवेचना कोतवाली पुलिस सलेमपुर को स्थानांतरित करने की अर्जी दी।

