पुरोला नगर पंचायत के अध्यक्ष हरिमोहन नेगी की मुश्किलें बढ़ती नज़र आ रहीं हैं अब वो अपने ही जवाबों की गुथ्थी में उलझनें लगे हैं। उन्होंने हर आरोप का घुमाकर जवाब देना उनपर अब भरी पड़ा है , क्यूंकि उन्होंने चालाकी से जवाब दिए लेकिन उन्हें याद नहीं रहा कि सरकार के नियम-कानून कितने जरूरी हैं। उन पर लगे आरोपों और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को देखते हुए रिपोर्ट में आरोप पेश हुए हैं जो निम्नवत है –
आरोप-1 : नगर पंचायत पुरोला में राज्य वित्त, 15वां वित्त, अवस्थापना विकास निधि की मदों में कराए गए सभी कामों में अनियमितता हुई है।
नेगी का जवाब – बोर्ड बैठक व सभासदों से मिले पत्रों के आधार पर निर्माण कार्य हुए हैं और माप पुस्तिका उपलब्ध हुई है। डीएम व निदेशालय की जांच में ये पाया गया कि नेगी का जवाब संतोषजनक नहीं है। एक ही काम को अलग-अलग मदों में भुगतान के लिए वो दोषी हैं।
आरोप-2 : 14 दिसंबर 2020 को हुई बोर्ड बैठक के प्रस्ताव पर नगर पंचायत के अभिलेखों की कटिंग पर ओवरराइटिंग हुई है।
जवाब – प्रस्ताव कर्मचारी ने बिना पूर्ण विराम और अव्यवस्थित लिखे थे। जांच में ये तथ्य सामने आया कि बोर्ड बैठक के प्रस्ताव को काटा गया और पारित संकल्पों की जानकारी विहित अधिकारी, जिला मजिस्ट्रेट व शहरी विकास निदेशालय को भी नहीं भेजी गई, अधिनियम 1916 की धारा 94 का उल्लंघन किया है।
आरोप-3 : नगर पंचायत अध्यक्ष ने निकाय में चार कार्मिकों को आउटसोर्स के माध्यम से तैनात किया।
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आरोप-4 : कोविड-19 के दौरान 26 लाख 25 हजार से अधिक की सामग्री खरीदी गई, जिसका कोई अभिलेख नहीं है।
2019 में चार स्वयंसेवक तैनात किए गए, लेकिन 2020 में निकाय की कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते पदमुक्त कर दिया गया। जांच में पाया गया कि नेगी ने 27 अप्रैल 2018 को जारी शासनादेश के प्रावधानों का उल्लंघन किया है।
आरोप-5 : विद्युतीकरण के नाम पर फर्जीवाड़ा हुआ है और सभासदों के परित आदेशों के विपरीत अध्यक्ष व ईओ ने अवैध तरीके से लाखों की धनराशि निजी में गड़बड़ है।
जवाब- निकाय में विद्युतीकरण की व्यवस्था अति आवश्यक थी। आपातकालीन स्थिति व अव्यवस्था को देखते हुए निकाय ने कोटेशन के माध्यम से एलईडी स्ट्रीट लाइटें खरीदीं। बिना टेंडर के दस लाख से अधिक की एलईडी लाइट खरीदी जाने में नियमावली 2017 का उल्लंघन हुआ।

