बीते दिन शुक्रवार को कानपुर देहात में जो बवाल हुआ पूरी तरह षड्यंत्र बताया गया है। कानपुर में बाजार बंदी की आड़ में हजारों लोग जुटाए गए। जबरदस्ती दुकानें बंद की गई। जिसकी खबर पुलिस को भी नहीं हुईं ,वहीं, पुलिस की जांच में बड़ी साजिश की बात सामने आई है, क्योंकि बगैर साजिश इतना बड़ा बवाल कराना संभव नहीं है। भाजपा प्रवक्ता ने जो बयान दिया उसके बाद ही साजिश रचनी शुरू हुई। इलाकों में बाकायदा पोस्टर चस्पा करने के साथ साथ पर्चे बांटे गए, जिसमें तीन तारीख को आह्वान किया गया था। उसका कोई लेनादेना नहीं है। पुलिस उस पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रही है। वीडियो मैसेज भी जारी किया था। पर्चे बांटकर बाकायदा पोस्टर भी लगाए गए थे।
किसी भी व्यक्ति का बिना नाम और संस्था के नाम के ये पोस्टर्स लगाए गए थे। बेकनगंज, चमनगंज, अनवरगंज समेत इलाकों में चस्पा किए गए थे, जिसमें तीन तारीख को बंदी का ऐलान किया गया था। इसी के तहत लोग जुटाए गए और फिर बवाल कराया गया। शुरुआती जांच के बाद हयात जफर हाशमी पुलिस के रडार पर आ गया है।
जब ये हिंसा चल रही थी तब पुलिस कर्मी पीछे को भागते दिखे जिसपर एसीपी बोले कि अरे चूड़ियां मंगवा दें क्या… पीछे क्यों हट रहे हो? ये शब्द किसी आम आदमी के नहीं, बल्कि एसीपी अनवरगंज अकमल खां के थे। हुआ यूं कि बवाल के दौरान वह और डीसीपी प्रमोद कुमार उपद्रवियों को खदेड़ने के लिए कई बार अकेले ही टियर गैस गन और सरकारी असलहा लेकर भीड़ के पीछे दौड़ रहे थे।

