हिन्दू रीति रिवाजों में कोई भी शुभ काम बिना मुहूर्त के नही होता है। और जब बात शादी ब्याह की हो तो ग्रह लग्न देखे बिना उसकी तारीख तक तय नहीं की जाती है। ज्योतिषाचार्यों की माने तो इस साल विवाह सहित सभी शुभ कार्यों के लिए सीमित मुहूर्त ही शेष हैं। ऐसे में कोरोना काल से अटकी शादियों को अभी और लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
धर्मनगरी हरिद्वार के प्रख्यात ज्योतिषाचार्य डॉ प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार इस वर्ष नवंबर-दिसंबर माह में विवाह इत्यादि के बहुत कम मुहूर्त हैं। उन्होंने बताया कि जब भी देवगुरु बृहस्पति मकर या सिंह राशि में आते हैं, उस वक्त विवाह नहीं करना चाहिए। विशेष रूप से यदि गुरु अपनी नीच राशि मकर में हों तो विवाह शुभ नहीं होता है। उन्होंने बताया कि गुरु को सबसे शुभ ग्रह कहा जाता है। गुरु और शुक्र दोनों ही विवाह के कारक है। इसमें भी गुरु को समस्त धार्मिक कृत्यों का देवता कहा जाता है। जब देवगुरु बृहस्पति मकर राशि में आते है तो वो अपनी शुभता खो देते हैं।
डॉ प्रतीक ने बताया की कुछ ज्योतिषीय ग्रंथो में मकर के गुरु में कोई भी शुभ कार्य करने की मनाही है। यदि गुरु नीच राशि मकर में हो, वक्री हो,अतिचारी हो, तो संन्यास दीक्षा, देव यात्रा, व्रत, नियम, यज्ञ, वेद दीक्षा, विवाह, गंगा स्नान, देव प्रतिष्ठा आदि कोई भी कार्य नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष गुरु 20 नवंबर से 5 अप्रैल 2021 तक मकर राशि में रहेंगे। इसमें भी 13 जनवरी 2021 से 13 फरवरी 2021 तक गुरु अतिचारी होंगे। ये पूरा समय किसी भी शुभ मुहूर्त के लिए अनुकूल नहीं होगा। उत्तर भारत में देव प्रभोदनी एकादशी के बाद विवाह प्रारंभ हो जाते है। परंतु इस बार गुरु के परम नीच अंशो में होने के कारण विवाह संस्कार नहीं होगा।
उन्होंने बताया कि 10 दिसंबर से 15 दिसंबर तक गुरु परम नीच अवस्था में होंगे, अतः इस दौरान भी विवाह नहीं होंगे। इसके उपरांत 31 दिसंबर से 13 जनवरी 2021 तक पोष मास रहेगा तथा 17 जनवरी से गुरु अस्त हो जाएंगे जो 13 फरवरी 2021 तक रहेंगे। साथ ही 8 फरवरी 2021 से शुक्र अस्त हो जाएंगे जो 12 अप्रैल तक इसी स्थिति में रहेंगे। इस कारण विवाह, दीक्षा, मूर्ति प्रतिष्ठा आदि सभी संस्कार केवल 7, 9, 10, या 21, 22, 25, 27, 30 नवंबर 2020 में ही किए जा सकते हैं। इसके अलावा कोई भी शुभ योग विवाह इत्यादि के लिए नहीं होगा।

